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Shimla News: सेब के पौधों की प्रूनिंग के बाद बागवान बगीचों में ही जला रहे टहनियां, प्रदूषण बढ़ा

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छोटे बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा ज्यादा दुष्प्रभाव
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले के ऊपरी इलाकों में बागवानों सेब के पौधों की प्रूनिंग के बाद टहनियों को काटकर बगीचों में ही जला रहे हैं। इससे वायु प्रदूषण बढ़ गया है। नारकंडा, रोहड़ू, ननखड़ी और ठियोग सहित अन्य इलाकों में पहाड़ियां इन दिनों धुएं से भरी हुई हैं। सर्दियों में पत्तियों और टहनियों को जलाने से उठने वाला धुआं बहुत घातक होता है। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा (सांस) के रोगियों को पर इसका बुरा असर पड़ता है। वायु प्रदूषण फैलने से इसका असर पर्यावरण पर भी पड़ता है। इसके चलते बर्फबारी और बारिश की संभावना कम हो जाती है। आमतौर पर दिसंबर के दूसरे हफ्ते में बागवान सेब के पौधों की काटछांट शुरू कर देते हैं। काटछांट के बाद निकली सेब की कटी टहनियों को बगीचों में ही जला देते हैं। पर्यावरण प्रेमियों ने मांग की है कि पहाड़ों की शुद्ध हवा को दूषित करने से रोकने के लिए प्रशासन को प्रभावी कदम उठाने जरूरी हैं।
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उद्यान विभाग शिमला की उपनिदेशक सुदर्शना नेगी ने कहा कि इसे रोकने के लिए विभाग बीते कई वर्षो से गांव स्तर पर शिविर लगा रहा है जिसमें बागवानों को जागरूक किया जा रहा है। बगीचा प्रबंधन के बाद टहनियों और पत्तियों को गड्ढे में क्रश करके डाला जाए। इनके सड़ने के बाद खाद बन सकती है। बावजूद इसके भी बागवान टहनियों को जलाना बंद नहीं कर रहे।
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