सूखे और बेमौसमी बारिश की वजह से खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। पूरा
सावन और आधे से ज्यादा भादो भी सूखे में गुजर गया। अश्विन मास में जाकर
इंद्रदेव प्रसन्न हुए, लेकिन अब बारिश के साथ आए तूफान ने बासमती 1509 धान
के सहित कई किस्मों को नुकसान पहुंचाया है।
अगर अब बारिश होती है तो किसान
का सोने पर पानी फिर सकता है। अनुमान है कि प्रति एकड़ दस से 15 प्रतिशत तक
धान की फसल को नुकसान की संभावना है। पैदावार में 25 प्रतिशत तक की कमी
दर्ज की जा रही है।
किसानों ने अतिरिक्त बोझ उठा कर जैसे-तैसे अपनी
फसल को तो जरूर पका लिया है, लेकिन अब किसान के सोने पर खतरे के बादल
मंडनाने लगे हैं।
फसल को पकाने में प्रति एकड़ का हिसाब लगाया जाए तो पांच
से छह हजार रुपये अतिरिक्त खर्च हुआ है। जिससे एक ओर किसान की जेब ढीली
हुई, वहीं दूसरी ओर पिछले दिन आए तूफान से कई जगह पर फसल बिछ गई है। इससे
लोगों को उत्पादन कम होने का डर भी सताने लगा है।
500 हेक्टेयर भूमि पर नहीं लगी धान
कम
बारिश की वजह से इस बार धान का रकबा भी पूरा नहीं हो पाया था। कृषि विभाग
ने जिले में एक लाख 65 हजार हेक्टेयर पर धान लगाने का टारगेट बनाया था,
लेकिन बादलों की बेवफाई को देखते हुए इस बार 500 हेक्टेयर भूमि पर धान नहीं
लग सकी। इस बार एक लाख 64500 हेक्टेयर पर धान की फसल खड़ी है।
इस वर्ष 37 फीसदी कम बारिश
अगस्त
माह तक 55 फीसदी से भी अधिक कम बारिश हुई, लेकिन सितंबर माह के आरंभ होते
ही यह आंकड़ा 37 फीसदी पर आ गया है। इस वर्ष सितंबर माह की 15 तारीख तक
614.2 एमएम बारिश हो चुकी है और अकेले सितंबर माह 256 एमएम बारिश हुई है।
एक सप्ताह नहीं होगी बारिश
मौसम
विभाग के प्रवक्ता श्याम सिंह चौहान के अनुसार एक सप्ताह तक बारिश की कोई
संभावना नहीं है। 30 सितंबर तक मानसून रहेगा, उससे पहले 23 से 28 तक बारिश
होने की संभावना है। जिससे कटाई के समय किसानों को परेशानी का सामना करना
पड़ सकता है।
धान की क्वालिटी में आई कमी, दाम गिरे
निसिंग।
कस्बे की अनाजमंडी में धान की आवक शुरू हो गई है। सीजन के शुरुआती चरण में
किसान धान की वैरायटी 1509 लेकर मंडी में पहुंच रहे हैं। सूखा और बेमौसमी
बारिश की मार झेल चुके किसानों को इस बार धान की फसल से फायदे की कोई
उम्मीद नहीं है। मंडी में 1509 किस्म के दाम औंधे मुंह गिर चुके हैं।
किसानाें को मिले दोहरे झटके से किसान मायूस हैं। मंडी व्यापारी व मार्केट
कमेटी के अधिकारी भाव में आई कमी के लिए मौसम को जिम्मेदार मानते हैं।
किसानों का कहना है कि मौसम की मार की वजह से पैदावार में कमी आई है, लेकिन
किसानों के चेहरे पर खुशी के बजाय मायूसी छायी है। पहले सूखा और फिर
बेवक्त बारिश ने धान के उत्पादक किसानों को तगड़ा झटका दिया है। मौसम की
मार का सीधा असर धान की पैदावार पर हुआ है, जिसके चलते धान की पैदावार में
प्रति एकड़ 25 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। पैदावार में आई कमी ने धान की
फसल से धन आने की बजाय किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। किसान
प्रीतम राणा गोंदर, चौधरी करण सिंह गुनियाना, ओम प्रकाश सांभली, भारतीय
किसान यूनियन के ब्लॉक प्रधान कुलदीप बब्बर, पूर्व सरपंच गोंदर रकम सिंह
राणा कहना है कि बेमौसमी बारिश से धान की पैदावार में 25 प्रशित की कमी आई
है। मंडी व्यापारी सुभाष सिंगला, राजिंद्र सिंगला, सुशील सिंगला, राजकुमार
गोयल का कहना है कि खराब मौसम से फसल की गुणवत्ता में भी कमी आई है। सीजन
के शुरू में 1509 किस्म के किसानों को बेहतर दाम मिले, लेकिन अब क्वालिटी
गिरने की वजह से कीमतों में गिरावट आई है।