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फर्जी डिग्री मामला: खारिज होने के बाद एमबीयू को कैसे मिली स्थापना को मंजूरी, होगी एफआईआर

Sat, 30 Jan 2021 09:52 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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डीजीपी संजय कुंडू - फोटो : अमर उजाला
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मानव भारती विश्वविद्यालय (एमबीयू) के फर्जी डिग्री मामले की जांच कर रही हिमाचल प्रदेश पुलिस और सीआईडी की एसआईटी जल्द एक और एफआईआर दर्ज कर सकती है। एफआईआर के बाद विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़ी गड़बड़ियों की जांच होगी।  डीजीपी संजय कुंडू ने शनिवार को पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता में बताया कि अगस्त, 2008 में तब की कैबिनेट ने मानव भारती चैरिटेबल ट्रस्ट के मानव भारती विश्वविद्यालय स्थापित करने के आवेदन को खारिज कर दिया था। दलील दी थी कि इनके पास न तो शैक्षणिक अनुभव है और न वित्तीय स्थिति मजबूत है। बावजूद इसके छह माह बाद ही फरवरी, 2009 में कैबिनेट ने शिक्षा विभाग के विश्वविद्यालय स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। जाहिर है कि छह महीने में कुछ तो ऐसा जरूर हुआ कि खारिज होने के कारण ही खत्म हो गए। डीजीपी ने कहा, तथ्यों के आधार पर जांच करेंगे।

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कहा कि सोलन में दर्ज तीन मामलों की जांच पूरी हो चुकी है और अब एमबीयू के मालिक एवं मुख्य आरोपी राजकुमार राणा के  परिवार के सदस्यों को आस्ट्रेलिया से हिमाचल प्रदेश लाने पर काम चल रहा है, जिसके लिए एसपी साइबर क्राइम संदीप धवल के नेतृत्व में टीम जुटी है। बताया कि राणा की दूसरी पत्नी ऊना निवासी एक पूर्व सैन्य अधिकारी की बेटी अश्वनी जो कि ट्रस्ट में ट्रस्टी भी है, उनके नाम दर्ज जमीन पर ही विश्वविद्यालय स्थापित है। राणा का पासपोर्ट पहले ही कैंसल कराया जा चुका है। डीजीपी ने कहा कि पहली बार है कि किसी शैक्षणिक संस्थान में धन शोधन की पुष्टि हुई है और प्रदेश पुलिस पहली एजेंसी है, जिसने वित्तीय जांच कर इसे पकड़ा है। एसपी रंजना चौहान की टीम ने वित्तीय जांच के बाद जब 194 करोड़ के काले धन की पुष्टि की तो उसे प्रवर्तन निदेशालय ने भी सही मानते हुए अटैचमेंट की कार्रवाई की। एसपी सोलन अभिषेक यादव की टीम जमीन खरीद संबंधी जांच कर रही है।

धूमल सरकार में मिली थी मंजूरी
भाजपा की धूमल सरकार के दौरान एमबीयू को विवि स्थापित करने की फरवरी 2009 में मंजूरी मिली थी। इससे छह महीने पहले अगस्त 2008 में भी इसी सरकार के दौरान कैबिनेट ने प्रस्ताव  खारिज किया था।
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55 हार्ड डिस्क में अभी 11 का हुआ है परीक्षण

डीजीपी ने बताया कि जांच टीमों के हाथ लगीं 55 हार्ड डिस्क में से 14 का परीक्षण हुआ है और उनमें 41 हजार डिग्रियों में से 36 हजार फर्जी मिली हैं। सौ डिग्रियों के सत्यापन के लिए एसपी वीरेंद्र कालिया के नेतृत्व में टीम ने 17 राज्यों का दौरा किया और 75 डिग्रियों के पतों का भी सत्यापन किया है। इनमें 47 फर्जी डिग्रियां रिकवर कर ली हैं। कई लोग विदेशों में हैं, उन्हें पेश होने को कहा है।    

आतंक के गढ़ त्राल और शोपियां तक गई जांच टीमें
पत्रकार वार्ता के दौरान मौजूद एडीजी सीआईडी एन वेणुगोपाल ने बताया कि फर्जी डिग्रियों की रिकवरी के लिए जम्मू-कश्मीर में आतंक के गढ़ त्राल और शोपियां जैसे इलाकों के अलावा यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, केरल समेत 17 राज्यों में लगातार टीमें दबिश दे रही हैं। अब तक 275 लोगों से पूछताछ और आठ लोग गिरफ्तार किए हैं। दो न्यायिक हिरासत में हैं।
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