हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के उपमंडल गगरेट के एक गांव के एक व्यक्ति ने कम आय प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए जालसाजी कर बीपीएल सर्टिफिकेट बना लिया। इसी प्रमाणपत्र के जरिये तहसीलदार के पास कम आय प्रमाण के लिए आवेदन कर दिया, लेकिन तहसीलदार ने जालसाजी कर बनाए गए बीपीएल प्रमाणपत्र को पकड़ लिया। दरअसल, समेकित बाल विकास परियोजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति के लिए यह सारा खेल खेला गया। बताया जा रहा है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर नियुक्ति के लिए कम आय प्रमाण पत्र की जरूरत रहती है। इसे हासिल करने के लिए गांव के एक साधन संपन्न परिवार के एक व्यक्ति ने 35,000 रुपये सालाना आय से कम आय का प्रमाणपत्र बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया।
इसके लिए अन्य औपचारिकताओं के साथ बीपीएल सर्टिफिकेट भी अपलोड कर दिया। तहसीलदार रोहित कंवर इसे सत्यापित करने लगे तो उन्हें बीपीएल सर्टिफिकेट पर शक हुआ। उन्होंने इसकी जांच के लिए खंड विकास अधिकारी से बात की। प्रारंभिक जांच में उक्त व्यक्ति का नाम बीपीएल सूची में शामिल नहीं मिला। तहसीलदार ने कम आय प्रमाण पत्र को रोक लिया। इस प्रकरण पर जांच भी बैठा दी। बीपीएल सर्टिफिकेट देखने में बिलकुल असली लगता है। उस पर पंचायत प्रधान और सचिव की मुहर भी लगी है। अब यह भी जांच का विषय है कि बीपीएल प्रमाणपत्र बनाने के लिए क्या फर्जी मुहर भी बनाई गई है।
उधर, तहसीलदार रोहित कंवर ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। पंचायत प्रधान का कहना है कि मामले में उन्हें व ग्राम पंचायत के तमाम सदस्यों को गुमराह किया गया। उन्होंने इसकी शिकायत खंड विकास अधिकारी से भी की, लेकिन उन्होंने भी कोई कार्रवाई नहीं की। अब उन्होंने इसकी लिखित शिकायत अंब पुलिस थाना में की है। उन्होंने उपायुक्त राघव शर्मा से इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।