अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव मंडी में देवी-देवताओं के साथ ऋषि-मुनियों के प्रतिरूप भी शिरकत करते हैं। इसमें पुंडरिक ऋषि भी शामिल हैं। पुंडरिक ऋषि के बारे में कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। उन्होंने 1952 में दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लिया था। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की ओर से मिले निमंत्रण के बाद पुंडरिक ऋषि ने समारोह में भाग लिया था। पुंडरिक ऋषि को दिल्ली तक पहुंचाने तथा वापस लाने की पूरी व्यवस्था की थी। पुंडरीक ऋषि ने 26 जनवरी 1952 की परेड में शामिल होकर देव संस्कृति को प्रदर्शित किया था। पुंडरिक ऋषि का मंदिर थलौट से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर रोपा में स्थित है। उनका भंडार कोट नामक स्थान पर है। मंदिर के पास एक पवित्र एवं दैवीय तालाब है। माना जाता है कि तालाब में मछलियां देवता के रूप हैं। माना जाता है कि जब से मंडी नगर में महाशिवरात्रि की शुरुआत हुई है तब से ही पुंडरिक ऋषि इसमें भाग लेते हैं।