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Shimla News: तकनीकी युग में विलुप्त हो रहे पारंपरिक वाद्ययंत्र

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हिमाचल के 54 सालों के सफर में आए कई बदलाव
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देव गीतों को अब रीमिक्स का रूप दे दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले 54 वर्ष पूरे हो गए हैं। इन 54 सालों में हिमाचल की संस्कृति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

तकनीकी युग में पारंपरिक वाद्ययंत्र अब विलुप्त होते जा रहे हैं। हिमाचल के पारंपरिक वाद्ययंत्र पश्चिमी यंत्रों से पिछड़ते जा रहे हैं। जिला भाषा अधिकारी शिमला अनिल हारटा ने बताया कि पहले जहां शादी समारोह सहित किसी भी तरह के धार्मिक कार्यक्रमों में पारंपरिक वाद्ययंत्रों का ही चलन था लेकिन अब इनकी जगह डीजे ने ले ली है। वाद्ययंत्र भी बजाय जाते हैं, लेकिन उस तरह का चलन अब नहीं रहा है। पारंपरिक वाद्ययंत्र वीणा के अब केवल किन्नौर में ही तीन वीणा वादक रह गए हैं। पारंपरिक वेशभूषा में बदलाव आया है। चोल्टू नृत्य का स्वरूप आज भी वही है लेकिन नाचते वक्त जो परिधान पहने जाते थे वह अब बदल चुके हैं।
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लोगों की रुचि को देखते हुए इसमें बदलाव हुआ है। इसके अलावा गायन शैली भी बदली है। पारंपरिक, फसलों और देव गीतों को अब युवाओं की रुचि के अनुसार रीमिक्स का रूप दे दिया है। हालांकि भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से हिमाचल की पारंपरिक संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ताकि युवा हमारी संस्कृति से रूबरू हो सके।
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