10 लाख रुपये जुर्माना भी करना होगा अदा संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला अदालत ने निचली अदालत के दोष सिद्ध के निर्णय और सजा के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने आरोपी प्रेम लता बुशैहरी को 30 दिन के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण के भी आदेश दिए हैं।
याचिकाकर्ता/आरोपी प्रेम लता ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (सीबीआई), डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की अदालत ने अपील को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया है।
दरअसल वर्ष 2016 को कमलानगर निवासी आरोपी प्रेम लता ने लोअर बाजार स्थित मैसर्स महालक्ष्मी ज्वैलर्स से आभूषण खरीदे थे। शिकायतकर्ता को 13,10,000 रुपये के आभूषणों की खरीद के लिए 12 लाख रुपये का भुगतान कर दिया था जिसमें कर भी शामिल था। शेष राशि के राज्य सहकारी बैंक के 3 लाख रुपये दो चेक जारी किए लेकिन वह बाउंस हो गए। इसके बाद ऋण राशि न चुकाने पर शिकायतकर्ता ने एनआई एक्ट के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष केस दायर किया था। इसके बाद अदालत ने दोषी को तीन महीने का कारावास और 10 लाख रुपये का जुर्माना भरने की सजा सुनाई थी। जुर्माना न देने पर तीन महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अब अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने दोषी को पारित सजा को भुगतने के लिए आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं।