अमर उजाला ने चेस्टर हिल परियोजना में नियमों की अनदेखी को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की थी और ग्राउंड रिपोर्ट में भी मौके पर बरती जा रही अव्यवस्थाओं का खुलासा किया था, जिसके बाद अब राज्य सरकार ने बिल्डरों पर नकेल कसने के लिए अपार्टमेंट एक्ट पुन: लागू करने का फैसला लिया है। एक्ट लागू होने के बाद सरकार बिल्डरों से एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्जेज (ईडीसी) की वसूली भी शुरू कर देगी। इसकी दरें नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की ओर से प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से नगर निगम क्षेत्रों, नियोजित क्षेत्रों और विशेष क्षेत्रों के लिए अलग अलग तय की जाएंगी।
बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बिल्डरों से सार्वजनिक सुविधाओं सड़क, सीवरेज, पानी और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था के लिए ईडीसी लिया जाता है। प्रदेश में आवासीय परियोजनाओं (अपार्टमेंट) के तहत होने वाले निर्माण को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया हिमाचल प्रदेश अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन एक्ट, 2005 सितंबर 2005 में लागू किया गया था। आवासीय परियोजनाओं से संबंधित पूरी प्रक्रिया पहले हिमुडा देखता था। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा 2016 में रेरा लागू किए जाने के बाद कानूनी एकरूपता लाने और दोहरे कानूनों से पैदा होने वाली जटिलताओं को खत्म करने के लिए अपार्टमेंट एक्ट को निरस्त कर दिया।