पिछली भाजपा सरकार में पुलिस महानिदेशक रहे डीएस मन्हास के परिवार की ओर से संचालित एक नर्सिंग कॉलेज पर दर्ज मुकदमे की जांच पर सरकार बदलने के साथ ही सवाल उठने लगे हैं। पूर्व डीजी ने पत्र लिखकर जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। कुछ तथ्यों को अनदेखा करने का हवाला देते हुए दोबारा जांच की मांग की है।
अब पुलिस मुख्यालय ने शिमला पुलिस से इस संबंध में टिप्पणी मांगी है। इसके आधार पर मामले में दोबारा जांच या जांच आगे बढ़ाने पर निर्णय लिया जाएगा। धूमल सरकार जाने के फौरन बाद डीएस मन्हास की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गई थीं। मन्हास और उनकी पत्नी पर वन भूमि पर अतिक्रमण के आरोप में विजिलेंस में मुकदमा दर्ज किया गया।
दूसरी ओर, वीरभद्र सरकार के दौरान उनके परिवार द्वारा संचालित नर्सिंग कॉलेज पर गलत तरीके से बच्चों को प्रवेश देने के बाद फीस न लौटाने का मामला दर्ज किया गया। मामले की जांच शिमला पुलिस ने की। जांच के बाद कोर्ट में चालान भी पेश किया।
इस बीच, विधानसभा चुनाव हुए और अब सरकार बदलने से पहले ही मन्हास ने पुलिस मुख्यालय को पत्र भेजकर मामले में हुई जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। बकौल मन्हास, शिमला पुलिस ने एक तरफा जांच की तथा उनके तथ्यों को शामिल नहीं किया गया।
बिना प्रबंधन की बात सुने मामले में जांच कर चालान पेश कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो पुलिस मन्हास की मांग पर दोबारा जांच को कोर्ट का रुख कर सकती है।
अगर दोबारा जांच न भी करानी हो तो वह अब तक हुई जांच में नए तथ्यों को शामिल कर कोर्ट में एडिशनल चार्जशीट पेश कर सकती है। सूत्रों की मानें तो अगर जांच दोबारा या आगे बढ़ी तो मन्हास को राहत मिल सकती है।