उधर पूर्व सीएम शांता कुमार के दो पेज के एक ट्वीट ने उपचुनाव से पहले राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मुलाकात के 10 घंटे बाद ही शांता ने ट्वीट किया कि अब वह 12 सितंबर को 86वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। चुनाव की राजनीति को वह अलविदा कह चुके हैं। अब सक्रिय राजनीति छोड़ दूंगा और विवेकानंद सेवा केंद्र को समय दूंगा।
इसके अलावा अपनी आत्मकथा को पूरा करने के लिए 13 सितंबर से चुपचाप एकांत में लिखने का काम करूंगा। इस दिन से लोगों से 12 से 1 बजे तक सिर्फ एक घंटा ही मिला करूंगा। इस ट्वीट से शांता ने साफ कर दिया है कि उपचुनाव में वह नाममात्र की भूमिका निभाएंगे। हालांकि राजनीतिक सूत्रों की मानें तो धर्मशाला उपचुनाव में भी शांता के पसंदीदा उम्मीदवार को लिस्ट में सबसे नीचे कर दिया है।
इससे पहले विधानसभा चुनाव में अपने शिष्य का टिकट कटने और लोकसभा चुनाव में कांगड़ा सीट से पसंदीदा प्रत्याशी को टिकट न मिलने से शांता पहले ही नाराज थे। हालांकि अमर उजाला से विशेष बातचीत में शांता ने कहा कि पार्टी के आदेशों के तहत धर्मशाला उपचुनाव में वह पूरी भूमिका निभाएंगे।