हिमाचल में समान काम के लिए समान वेतन देने का मामला राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में पहुंच गया है। राजकीय अध्यापक संघ ने इस मामले को लेकर ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की है। 27 फरवरी को याचिका पर सुनवाई होना तय हुआ है। राजकीय अध्यापक संघ की ओर से सुप्रीमकोर्ट के फैसले को प्रदेश में लागू करवाने के लिए यह याचिका दायर की गई है।
संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि संघ अनुबंध पर भर्तियों का सदैव विरोधी रहा है और नियमित आधार पर भर्तियों की पैरवी की गई है। वीरेंद्र चौहान ने कहा कि संघ अनुबंध को खत्म करने की लड़ाई सरकार और कोर्ट के समक्ष जारी रखेगा। इस याचिका के माध्यम से सुप्रीमकोर्ट के आदेशों के अनुसार हिमाचल में सभी को समान काम के बदले समान वेतन दिलाया जाएगा।
इससे अनुबंध भर्ती समाप्त हो जाएगी और पहली नियुक्ति से ही लाभ और भत्ते दिए जाएंगे। कहा कि साल 2008 से लेकर अब तक हजारों अनुबंध पर नियुक्त सभी श्रेणियों के अध्यापक जिनमें पीजीटी, टीजीटी, सीएंडवी, जेबीटी शामिल हैं, को उनकी अनुबंध सेवा को नियमित सेवा के बराबर का हक दिलवाने के मामले पर सुनवाई 27 फरवरी को होनी है।
बताया कि यह सुनवाई करीब दो हजार टीजीटी और पीजीटी शिक्षकों के रिकवरी मामले पर तय की गई है। राजकीय अध्यापक संघ के मुताबिक जिस पद पर सरकार ने भर्ती की और अनुबंध अध्यापक ने उस पद पर 5 से 6 वर्ष सेवा की हो, उसी पद पर उस समय की पद वरिष्ठता नहीं मिलना असंवैधानिक है।