पर्यावरण मंत्रालय के दो बार नोटिस जारी करने के बाद भी कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन का निर्माण कार्य बंद नहीं हुआ है। जिला वन अधिकारी (डीएफओ) ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के मंडी जोन कार्यालय को पत्र भेजकर काम बंद करने के आदेश जारी किए थे लेकिन काम जारी रहा। अब दोबारा एनएचएआई को पर्यावरण मंत्रालय के आदेशों का हवाला देते हुए दूसरी बार काम बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं। डीएफओ ने साफ किया है कि अगर निर्माण कार्य पर रोक न लगी तो वन विभाग एनएचएआई पर कड़ी कार्रवाई करेगा।
उल्लेखनीय है कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के रोड अलाइनमेंट में बदलाव और अन्य अनियमितताओं को लेकर पर्यावरण मंत्रालय ने प्रदेश सरकार से पिछले एक साल में तीन बार रिपोर्ट मांगी। लेकिन प्रदेश सरकार की तरफ से कोई रिपोर्ट तैयार नहीं की गई। बीते 25 जून को वन संरक्षण अधिनियम 1980 का हवाला देते हुए मंत्रालय ने प्रदेश सरकार को उक्त फोरलेन का निर्माण कार्य बंद करने के आदेश जारी किए थे। कोई कार्रवाई न होने पर मंत्रालय ने प्रदेश सरकार को 13 अगस्त को रिमांइडर पत्र भी जारी किया है।
वन संरक्षण अधिनियम का माना जाएगा उल्लंघन
पर्यावरण मंत्रालय ने उक्त फोरलेन के निर्माण कार्य को लेकर राज्य शासन को निर्देशित किया था कि जब तक वन संरक्षण अधिनियम 1980 के अंतर्गत सक्षम प्राधिकरण से स्वीकृति नहीं ली जाती, तब तक तत्काल प्रभाव से कार्य रोक दिया जाए। स्वीकृति लिए बिना किया गया किसी भी प्रकार का कार्य वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा। इस संबंध में एनएचएआई को दो बार नोटिस जारी कर दिया गया है। आदेशों की अवहेलना पर एनएचएआई के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- सरोज भाई पटेल, डीएफओ बिलासपुर