नौकरीपेशा माता-पिता से नहीं होती बात, बच्चे पढ़ा छोड़ झेल रहे तनाव
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युवा परामर्श केंद्र पहुंचे चौंकाने वाला मामला, जमा एक कक्षा के बाद बच्चे ने छोड़ दी पढ़ाई, तनाव में गया तो लाए परामर्श केंद्र क्रॉसर
अब माता-पिता की भी करनी पड़ रही काउंसलिंग
बच्चे बोले, माता-पिता से कभी कभार होती है बात
अभिभावकों का तर्क, रात को जागते, दिन में सोते हैं बच्चे अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। यदि माता-पिता दोनों नौकरीपेशा हैं और बच्चों को समय नहीं दे पा रहे हैं तो इससे भी आपके लाडले तनाव में जा सकते हैं। राजधानी में बीते छह महीने में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जिनमें बच्चों के तनाव में जाने का कारण उनके माता-पिता की अनदेखी भी मिली है।
अब बच्चों के साथ इनके अभिभावकों की भी काउंसलिंग करनी पड़ रही है। उपायुक्त कार्यालय परिसर में चल रहे युवा परामर्श केंद्र में ऐसे कई मामलों में काउंसलिंग चल रही है। हाल ही में छोटा शिमला क्षेत्र से अभिभावक अपने बेटे को साथ लेकर परामर्श केंद्र पहुंचे थे। बेटे ने होनहार होने के बावजूद अचानक जमा एक कक्षा में पढ़ाई छोड़ दी। वह मोबाइल में खो गया। दिन में सोता तो रातभर जागकर मोबाइल चलाता। बाद में मोबाइल भी छोड़ दिया और तनाव में रहने लगा। माता-पिता दोनों नौकरी पेशा हैं। मां ने कहा कि बेटे का अब पढ़ाई में मन नहीं लग रहा। मनोचिकित्सक ने जब बच्चे से बात की तो इसने बताया कि उसे पढ़ाई लिखाई में कोई गाइड नहीं कर रहा। माता-पिता के पास समय नहीं है। वह सुबह ही काम पर निकल जाते हैं, उनसे अब ज्यादा बात भी नहीं होती। पढ़ाई में मन नहीं लगा। मोबाइल चलाने लगा ताकि समय गुजर सके। मनोचिकित्सक ने बच्चे को तनाव कम करने, खुश रहने, पढ़ाई में मन लगाने के तरीके बताए। साथ ही माता-पिता को भी जागरूक किया कि बच्चे पर ध्यान दें, उससे रोज बात करें। बच्चे को क्या पसंद है, कहां दिक्कत आ रही है, उसे जानें। इन्हें हर हफ्ते काउंसलिंग के लिए बुलाया जा रहा है।
पहले भी सामने आ चुके मामले
दो महीने पहले विकासनगर से भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था। छात्रा ने महज इसलिए पढ़ाई छोड़ दी कि उसकी सहेली भी अब स्कूल नहीं जा रही। छात्रा के अभिभावकों ने भी इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया लेकिन जब अकेले रहने लगी तो इसे मनोचिकित्सक के पास ले गए। यहां मनोचिकित्सक ने समझाया कि स्कूल में नया फ्रेंड सर्किल बन सकता है। माता पिता को भी जागरूक किया गया कि बच्चों के तनाव में जाने का कारण जानें। इनसे बात करते रहें। इनकी दोस्ती किससे है, इसका ध्यान रखें। उपायुक्त कार्यालय परिसर स्थित युवा परामर्श केंद्र के मनोचिकित्सक मनोज सहगल ने बताया कि कई बार अभिभावक नौकरीपेशा होने पर बच्चों पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते हैं। ऐसे में बच्चे भटक सकते हैं। अभिभावकों को जिम्मेदारी समझनी चाहिए। ऐसे मामले सामने आने पर अभिभावकों को भी समझाया जा रहा है।