हिमाचल की जयराम सरकार ने पिछले दो साल में विकास की बयार बहाने का दावा किया है। मुख्यमंत्री जयराम दावा कर चुके हैं कि पिछले दो साल में 1755 किलोमीटर मोटर योग्य और 111 किमी जीप योग्य सड़कों का निर्माण किया गया। वहीं, 204 नए जनगणना गांवों को सड़कों से जोड़ा गया। यही नहीं, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत पहाड़ी राज्यों में श्रेष्ठ कार्य करने के लिए हिमाचल को तीन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं और योजना में अच्छे प्रदर्शन के लिए 65.51 करोड़ रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि भी मिली है।
इस सारी कवायद को कर सरकार हिमाचल की तस्वीर बदलने की कोशिश में जुटी हुई है। लेकिन सड़कों के रखरखाव की चुनौती से सरकार नहीं निपट सकी।
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों और दावों में मेंटनेंस की बात का जिक्र भी नहीं किया जा रहा। ऐसा इसलिए है क्योंकि सरकार नई सड़क तो बना रही लेकिन पुरानी सड़कों की हालत उसके दावों की पोल खोल देती। राजधानी शिमला का टूटीकंडी बाईपास हो या फिर प्रदेश के विभिन्न इलाकों की सड़कें। लोगों को खस्ताहाल सड़कों पर सफर करना पड़ रहा है।
जहां सड़कों का पैचवर्क किया जा रहा है, वहां चंद दिन में ही फिर से गड्ढे हो रहे हैं। चूंकि मुख्यमंत्री दौरों पर ज्यादातर जगह हेलीकॉप्टर से जाते हैं, इसी वजह से कांग्रेस भी उन्हें हेलीकॉप्टर वाला सीएम कहने से गुरेज नहीं करती। इस विवाद के बीच नेभारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण प्रदेश के पीडब्ल्यूडी विभाग को मंडी पठानकोट और शिमला मटौर एनएच की देखरेख की और जिम्मेदारी देना चाह रही है लेकिन पहले से बजट की कमी के चलते अपनी सड़कों की मेंटनेंस करने में नाकाम प्रदेश पीडब्ल्यूडी विभाग बिना बजट के इन दोनों एनएच की देखरेख करने से पहले ही हाथ खड़े कर चुका है।
सड़कों की खस्ता हालत पर उठ रहे सवालों का ही नतीजा है कि हाल में प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने खुद भी तीसरे साल गुणवत्ता युक्त पानी और सड़कों की बेहतर हालत पर जोर देने की बात कही है। देखना यह है कि सरकार के तीसरे साल अफसरशाही किस तरह मुख्यमंत्री के इस एलान को अक्षर शह पूरा करती है।
पहली बार रिकवरी भी कर रही सरकार
जयराम सरकार के दो साल के कार्यकाल में सड़कों की मेंटनेंस में लापरवाही पर ठेकेदारों पर गाज भी गिर रही है। पहली बार ऐसा है कि दो दर्जन से ज्यादा ठेकेदारों से वर्क कांट्रेक्ट के तहत दोबारा मेंटनेंस के लिए भी दबाव बनाया गया। यही नहीं कुछ की रिकवरी तो कुछ मामलों में भ्रष्टाचार के एंगल से जांच तक की जा रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन गठित क्वालिटी कंट्रोल सेल भी लगातार सड़कों की क्वालिटी पर नजर रख कर लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई के लिए पीडब्ल्यूडी को लिख रहा है।