शराब ठेके का संचालन करने के दौरान लाइसेंस लेने के लिए अब ठेकेदारों को बैंक गारंटी और एफडी देनी पड़ेगी। नए वित्त वर्ष के लिए नई शराब नीति में कई तरह के बदलाव किए जाएंगे, जिनमें जमीन के बजाय एफडी लेने के अलावा शराब ठेके को टीनशेड के बजाय आकर्षक बनाने की शर्त जोड़ी जाएगी। हाल में ठेकेदारों व अफसरों के साथ हुई बैठकों के बाद विभाग ने शराब नीति में बदलाव की कवायद शुरू कर दी है। दरअसल, पिछले कुछ सालों में विभिन्न ठेकेदारों के पास सरकार के करीब ढाई सौ करोड़ रुपये की रिकवरी फंस गई है।
लाइसेंस लेने के दौरान चूंकि पहले जमीन के दस्तावेज लिए जाते थे और जमीन को जब्त करने में कई तरह के कानूनी व्यवधान थे। लिहाजा, विभाग न तो रिकवरी कर पा रहा है और न ही जमीन को अधिगृहीत किया जा पा रहा है। इस परेशानी को देखते हुए आबकारी विभाग अब वर्तमान शराब नीति में बदलाव करने की तैयारी में जुट गया है। प्रमुख सचिव आबकारी संजय कुंडू ने बताया कि कई मामलों में रिकवरी के दौरान कुछ परेशानियां सामने आई थीं जिसके बाद आबकारी नीति में बदलाव कर संपत्ति दस्तावेज के बजाय बैंक गारंटी या फिक्स डिपॉजिट लेने पर विचार किया जा रहा है।