प्रोजेक्ट से जुड़े आईआईटी के प्रो. वरुण दत्त का कहना है कि मशीन लर्निंग आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तकनीक से आकलन कर अलॉगरिदम पद्धति पर यह शोध किया जा रहा है। इससे देश के हर स्वास्थ्य संस्थान को जोड़ा जाएगा।
इसमें बीमारियों और रोगियों से संबंधित तमाम जानकारी एवं कंडक्ट सर्वे को डाटा में शामिल किया जाएगा। प्रोजेक्ट के तहत एक मशीन लर्निंग पोर्टल भी बनाया जाएगा। इस पोर्टल में संबंधित शोध से जुड़े डाटा को साझा किया जाएगा।
प्रो. वरुण का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ कार्ड से न केवल संबंधित व्यक्ति को हेल्थ चेकअप में लाभ मिलेगा, बल्कि स्वास्थ्य योजनाएं बनाने में भी इसकी अहम भूमिका होगी।
सरकार के पास देश में फैल रहे रोगों और रोगियों का डाटा आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। इससे नीति निर्धारण में मदद मिलेगी। फार्मा के क्षेत्र में भी यह बहुत उपयोगी होगा। इससे दवाओं की गुणवत्ता पर काम होगा और सस्ती दवाएं तैयार की जा सकेंगी।
आईआईटी मंडी के विशेषज्ञ इस प्रोजेक्ट के तहत एक ऐसा टूल भी ईजाद कर रहे हैं, जिससे दुर्लभ बीमारियों का पता लगाया जा सके। इसे रेयर डिजीज फिजीशियन फाइंडर का नाम दिया गया है। इसमें संबंधित बीमारी के इलाज एवं उसके विशेषज्ञ चिकित्सक की जानकारी मिल सकेगी। इसे भी इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ कार्ड से लिंक किया जा सकेगा।
इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ कार्ड बनाने की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। इसके लिए संस्थान ने एक प्रोजेक्ट अमेरिका की एक कंपनी से हाल ही में करार किया है। इस पर काम भी शुरू कर दिया है। शोध कर इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ बनाकर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी, ताकि इसके लिए देश में आवश्यक ढांचा विकसित करने की योजना बनाई जा सके।- प्रो. टिमोथी गोंजाल्विस, निदेशक, आईआईटी मंडी