हर साल दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और यूपी को गर्मियों में हिमाचल बैंकिंग पर बिजली देता है। सर्दियों के मौसम में इसे वापस लिया जाता है। मार्च महीने तक पड़ोसी राज्यों से बैंकिंग पर बिजली ली जाएगी। प्रदेश के अपने बिजली प्रोजेक्टों में औसतन 200 से 220 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। सर्दियों के मौसम में हर साल उत्पादन घटता है।
हिमाचल प्रदेश की 1500 मेगावाट के नाथपा-झाकड़ी बिजली प्रोजेक्ट में वर्तमान में सिर्फ 6.5 मिलियन यूनिट बिजली की पैदावार हो पा रही है। इस प्रोजेक्ट की बिजली उत्पादन की क्षमता प्रतिदिन 36 मिलियन यूनिट की है। बारिश और बर्फबारी कम होने से इस प्रोजेक्ट में करीब 30 मिलियन यूनिट कम उत्पादन हो रहा है।
बर्फबारी और बारिश न होने से सतलुज नदी का जलस्तर घटा है। 412 मेगावाट के रामपुर पन बिजली प्रोजेक्ट में भी बिजली उत्पादन पहले से घटा है। उधर, नाथपा झाकड़ी बिजली परियोजना प्रमुख संजीव सूद बताते हैं कि हर साल बरसात और सर्दियों के दौरान बिजली उत्पादन कम होता है।
बारिश और बर्फबारी न होने के बावजूद बिजली बोर्ड के दो दर्जन पन विद्युत प्रोजेक्टों में इस वर्ष जनवरी माह में पिछले दो वर्षों के मुकाबले लगभग बराबर विद्युत उत्पादन दर्ज किया गया है। जनवरी माह में केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग ने बोर्ड के पन विद्युत प्रोजेक्टों में 60.980 मिलियन यूनिट उत्पादन का लक्ष्य रखा था।
इस दौरान बोर्ड ने 60.276 मिलियन यूनिट उत्पादन कर लक्ष्य को हासिल कर लिया है। बोर्ड ने जनवरी 2016 में 43.288 मिलियन यूनिट और जनवरी 2017 में 62.151 मिलियन यूनिट उत्पादन दर्ज किया था।
इससे साफ है कि गत वर्षों के मुकाबले इस बार जनवरी माह के दौरान उत्पादन में सूखे के बाद भी फर्क नहीं पड़ा है। बिजली बोर्ड के मुख्य अभियंता (उत्पादन) पंकज कपूर ने बताया है कि सूखे के बावजूद इस बार के निर्धारित लक्ष्य के बराबर विद्युत उत्पादन हुआ है।