1500 मेगावाट की नाथपा झाकड़ी पन विद्युत परियोजना से लाभान्वित होने वालेनौ राज्यों में बिजली संकट बढ़ सकता है। ढाई मेगावाट की नोगली परियोजना से लाभान्वित होने वाले रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में बिजली की समस्या हो सकती है।
झाकड़ी परियोजना से लाभान्वित होने वाले 9 राज्यों हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़, दिल्ली और हिमाचल में बिजली संकट बढ़ सकता है।
दरअसल 1500 मेगावाट नाथपा झाकड़ी पन विद्युत परियोजना में 75 फीसदी बिजली उत्पादन घट गया है। पिछले कई दिन से बारिश और बर्फबारी न होने से सतलुज नदी का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। इससे परियोजना की टरबाइनों की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
इस कारण कम हो रहा उत्पादन
सतलुज नदी की सहायक खड्डों पर बनी परियोजनाओं पर भी संकट खड़ा हो गया है। नाथपा झाकड़ी पन विद्युत परियोजना पर निर्भर देश के नौ राज्यों की बिजली आपूर्ति पर विपरीत असर पड़ा है।
एसजेवीएन की 1500 मेगावाट नाथपा-झाकड़ी परियोजना में प्रतिदिन 36 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन होता है, जो इन दिनों घटकर 8 मिलियन यूनिट ही रह गया है। सतलुज में जलस्तर गिरने से नाथपा-झाकड़ी परियोजना में 8 मिलियन यूनिट प्रतिदिन बिजली उत्पादन हो रहा है,
जबकि सतलुज में पानी का स्तर सही रहने पर प्रतिदिन 36 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन होता है। पानी का स्तर घटने से बिजली के उत्पादन में 75 प्रतिशत तक गिरावट आई है। अब यह क्रम फरवरी के अंत तक रहने की संभावना है।
इस समय चलाए जा रहे टरबाइन
इन दिनों केवल सुबह और शाम को ही बिजली उत्पादन हो रहा है। दोपहर को पानी की कमी से सभी टरबाइनें बंद रखी जा रही हैं। यदि मौसम का मिजाज बदलता है और बारिश, बर्फबारी होती है तो सतलुज और सहायक खड्डों में पानी का स्तर बढ़ने के आसार बन सकते हैं।
जहां एशिया की सबसे बड़ी भूमिगत जल विद्युत परियोजना पानी का स्तर घटने से मुश्किल के दौर से गुजर रहा है, वहीं छोटी-छोटी खड्डों पर बनी परियोजनाओं में भी पानी की कमी से दिक्कतें बढ़ गई हैं।
नोगली परियोजना से रामपुर, ब्रौ, जगातखाना, नोगली, तकलेच, बाहली, ननखड़ी क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति की जाती है। इस परियोजना में भी सामान्य दिनों की अपेक्षा बिजली उत्पादन कम हो रहा है।
नाथपा झाकड़ी परियोजना प्रमुख संजीव सूद ने कहा कि परियोजना में बिजली उत्पादन में गिरावट आई है। टरबाइनों को सुबह और शाम ही चलाया जा रहा है।