पश्चिमी दुनिया में फोक्सवैगन, वोल्वो, फोर्ड और बीएमडब्ल्यू जैसी ऑटोमोबाइल कंपनियां ताप विद्युत का व्यर्थ ताप वापस पाने की प्रक्रिया विकसित कर रही हैं। जिससे ईंधन खपत में तीन से पांच प्रतिशत तक सुधार की संभावना है। थर्मोइलैक्ट्रिक एनर्जी हार्वेस्टिंग के अन्य संभावित उपयोगों में ज्यादा बिजली खपत करने वाले उपकरण और इलैक्ट्रॉनिक्स, हवाई जहाज और अंतरिक्ष यान से उत्पन्न ताप का उपयोग भी शामिल हैं।
शोध में इन्होंने दिया साथ
शोध समूह ने नए सॉफ्ट फोनो मोड का अवलोकन किया है जो मटीरियल्स के अंदर क्रिस्टलाइन ऐनहार्मोनीसीटी का प्रदर्शन करते हुए बेहतर तापविद्युत क्षमता का संकेत देते हैं। विभिन्न मटीरियल के लिए 1 - 1.6 की रेंज में उच्च फिगर ऑफ मेरिट का प्रदर्शन करते हैं। प्राप्त परिणाम पर अधिक जानकारी जुटाने और सुधार करने की संभावना देते हैं। उन्होंने बताया कि इस शोध के लिए आईआईटी मंडी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग - विज्ञान एवं इंजीनियिरंग शोध बोर्ड (डीएसटी-एसईआरबी) और आणविक ऊर्जा विभाग - नाभिकीय विज्ञान शोध बोर्ड (डीएई-बीआरएनएस), भारत ने व्यापक वित्तीयन सहयोग दिया है।