जांच रिपोर्ट के अनुसार साल 2013 से शिक्षा निदेशालय ने छात्रवृत्ति राशि के आवंटन में निजी शिक्षण संस्थानों को तरजीह दी। सरकारी संस्थानों के आवेदन आने के बावजूद पहले निजी संस्थानों के आवेदन वेबसाइट पर अपलोड किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार साल 2013 के दौरान पहले आओ पहले पाओ के आधार पर छात्रवृत्ति राशि जारी होती थी। सरकारी और निजी संस्थानों के लिए अलग-अलग बजट की व्यवस्था नहीं थी।
इसका लाभ उठाते हुए कुछ निजी शिक्षण संस्थानों ने शिक्षा विभाग के अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को चपत लगाई। साल 2015-16 के दौरान सरकारी संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति नहीं मिलने के मामले सामने आने के बाद सरकार ने छात्रवृत्ति राशि को सरकारी और निजी संस्थानों के लिए बांटा था।
शिक्षा विभाग में 150 करोड़ से अधिक राशि के छात्रवृत्ति आवंटन घोटाले का मामला सीबीआई को भेजने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय इस बाबत केंद्र सरकार को पत्र भेजेगा।
केंद्र सरकार मामले को कार्मिक मंत्रालय को भेजेगी। कार्मिक मंत्रालय जांच करने का अंतिम फैसला लेगा। विधायक राकेश सिंघा विधानसभा में उठाएंगे छात्रवृत्ति घोटाला
माकपा विधायक राकेश सिंघा विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान 29 अगस्त को शिक्षा विभाग में हुए 150 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले का मामला उठाएंगे। विधायक ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति राशि के आवंटन को लेकर सवाल पूछे हैं।