विक्रमादित्य सिंह भी काफी एफिशिएंट मंत्री: रोहित
रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के अफसरों का तो एक तरह से नैतिक कर्तव्य भी बनता है। एक तरह से हम स्टेटमेंट को जनरलाइज नहीं कर सकते हैं। जहां तक इस तरह की नकारात्मक सोच की बात आती है तो हम मात्र ऑल इंडिया सर्विस तक सीमित नहीं कर सकते। इस तरह की नकारात्मक सोच, दृष्टिकोण के लोग प्रदेश से संबंधित भी मिलेंगे। इस संबंध में राज्य के मुखिया होने के नाते मुख्यमंत्री से आग्रह है कि लोक निर्माण मंत्री के संशय पर स्थिति स्पष्ट की जाएं । क्योंकि लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी काफी एफिशिएंट मंत्री है, जो उन्होंने कुछ बात रखी है उसमें उनकी जो शंकाएं हैं, मुख्यमंत्री उन्हें दूर करें ताकि पूरी स्थिति स्पष्ट हो।
सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंत्री-अफसर विवाद पर चुप्पी तोड़ी
हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंत्री-अफसर विवाद पर चुप्पी तोड़ी है। दिल्ली में गुरुवार शाम मीडिया से बातचीत में सीएम ने कहा कि मंत्री और अफसरों के बीच कोई विवाद नहीं है, कई बार ऐसी बातें होती है, लेकिन इन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं। सीएम सुक्खू ने कहा कि सभी अधिकारी अच्छी तरह से काम कर रहे हैं।
सुरेश कुमार बोले- मंत्री ठीक हो तो अधिकारी खुद ठीक करते हैं काम : सुरेश कुमार
लोक निर्माण विभाग के मंत्री विक्रमादित्य सिंह की ओर से आईएएस अधिकारियों को लेकर दिए गए बयान के बाद अब कांग्रेस के विधायकों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। मुख्यमंत्री के गृह जिला हमीरपुर से भोरंज विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुरेश कुमार ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि मंत्री स्वयं ठीक हों तो अधिकारी अपने आप ठीक ढंग से काम करते हैं। विधायक सुरेश कुमार ने कहा कि अधिकारियों को नियंत्रित करना मंत्री का कार्य होता है। यदि कोई मंत्री यह भूमिका ठीक से नहीं निभा पा रहा है तो उसे दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपने भीतर झांककर देखना चाहिए कि कहीं कमी स्वयं में तो नहीं है। उन्होंने कहा कि नेतृत्व शीर्ष पर होता है और वही कार्यों को दिशा देने का काम करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकारी और कर्मचारी नेतृत्व की ओर से दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार ही कार्य करते हैं। यदि कोई मंत्री स्पष्ट और प्रभावी दिशा-निर्देश देने में सक्षम नहीं है, तो उसे इस विषय पर गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिए।
हमारे प्यार को कमजोरी न समझें, अड़ंगा डालने वालों को बख्शेंगे नहीं : विक्रमादित्य
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की ओर से अफसरों पर की गई टिप्पणी को लेकर सियासी घमासान मचा है। विक्रमादित्य सिंह अपने बयान पर अडिग हैं। शुक्रवार को विक्रमादित्य ने कहा कि हम सबसे विनम्रता में बात करने पर विश्वास रखते हैं। अगर बिना मतलब से कोई अड़ंगा डालेगा और प्राॅब्लम क्रिएट करेगा, प्रदेश हित में उसे बख्शा नहीं जाएगा। हम किसी से डरने वाले नहीं हैं। हमारा स्वभाव रहा है कि बात विनम्रता से की जाए। अगर कोई व्यक्ति हमारे प्यार को कमजोरी समझने की गुस्ताखी करने की कोशिश करेगा, उसे सहन नहीं किया जाएगा। मंत्री के इस बयान से हिमाचल की राजनीति में फिर हलचल मच गई है।
विक्रमादित्य सिंह का बयान गैर जरूरी और नुकसानदेह : धर्माणी
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने मंत्री विक्रमादित्य सिंह को नसीहत देते हुए उनके बयान को गैर-जरूरी और नुकसानदेह बताया है। धर्माणी ने कहा कि लोकतंत्र के चार स्तंभों में कार्यपालिका का विशेष महत्व है। ऑल इंडिया सर्विसेज के तहत अधिकारियों की नियुक्ति भारत सरकार करती है और प्रदेश के विकास में इन अधिकारियों की अहम भूमिका होती है। अगर विक्रमादित्य सिंह को किसी अधिकारी से कोई समस्या थी, तो उन्हें इसे मीडिया में उछालने के बजाय कैबिनेट की बैठक में रखना चाहिए था या मुख्यमंत्री से सीधे संवाद करना चाहिए था। सार्वजनिक मंच पर ऐसे बयान देने से देशभर में गलत संदेश जा रहा है। धर्माणी ने चिंता जताते हुए कहा कि हिमाचल के भी कई प्रतिभाशाली अधिकारी दूसरे राज्यों में सेवाएं दे रहे हैं। यदि हिमाचल में बाहरी राज्यों के अधिकारियों पर सवाल खड़े किए जाएंगे, तो अन्य राज्यों में तैनात हिमाचल के अधिकारियों को भी बेवजह परेशानी और असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने याद दिलाया कि हिमाचल कई विकास कार्यों के लिए अन्य राज्यों पर भी निर्भर रहता है, ऐसे में इस तरह की बयानबाजी आपसी संबंधों को प्रभावित कर सकती है।