इसके तहत सरकारी स्कूलों से पढ़कर वर्तमान में समाज में किसी सम्मानजनक स्थान पर पहुंचे व्यक्तियों से आज के विद्यार्थियों को अवगत करवाने के लिए स्कूलों में गौरव पट्ट लगाए गए हैं।
पहले सरकार ने गौरव पट्ट पर नाम लिखवाने के लिए पांच हजार रुपये देने की शर्त रखी थी, लेकिन कम लोगों के आने के चलते इस शर्त को भी हटा दिया है। बावजूद इसके योजना को अपेक्षाकृत सफलता नहीं मिल रही है।
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि योजना का अनुपालन सरकार के निर्देशों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। इस कारण योजना को निचले स्तर में आशातीत सफलता प्राप्त नहीं हो रही है।
उन्होंने सभी जिला उपनिदेशकों को आदेश देते हुए कहा कि सभी स्कूलों में गौरव पट्ट का स्थापित करना सुनिश्चित किया जाए। गौरव पट्ट में दर्ज विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त हस्तियों के नाम की नवीनतम स्थिति स्कूलवार निदेशालय भी भेजी जाए।