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प्रदेश के शिक्षकों के लिए बुरी खबर

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प्रदेश शिक्षा विभाग सैकड़ों हेडमास्टर और लेक्चरर को इस बार भी डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (डीपीसी) के बिना ही 325 शिक्षकों को पदोन्नत करने जा रहा है। मतलब साफ है पद तो प्रिंसिपल का मिलेगा लेकिन वेतन और लाभ हेडमास्टर और लेक्चरर के ही रहेंगे।
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विभाग शीघ्र ही 135 हेडमास्टर और 190 लेक्चरर कैडर के शिक्षकों को सिर्फ नाम के लिए पदोन्नत करने जा रहा है। प्रदेश भर में 350 से अधिक प्रिंसिपलों के पद खाली है। फाइल बिना डीपीसी के सरकार तक पहुंच चुकी है, स्थान चयनित हो चुके है और इसी सप्ताह आर्डर जारी होंगे।

विभाग ने वर्ष 2013 में 376 प्रिंसिपलों को बिना डीपीसी के ही प्रिंसिपलों के पद पर समायोजित कर दिए और आज तक इन्हें प्रिंसिपल पद (प्रमोशन) का लाभ नहीं मिला है। हेडमास्टर और लेक्चरर का आरोप हैं कि विभाग 2007 से अब तक 1650 से प्रिंसिपल नियमित नहीं हो सके हैं जिस कारण इन्हें लाखों में वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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वित्तिय लाभ से रहना होगा वंचित

अब फिर से विभाग इस प्रक्रिया को दोहरा रहा है और  325 शिक्षकों को बिना डीपीसी प्रमोट करने जा रहा है। इन हेडमास्टर और लेक्चरर को प्रिंसिपल बनने के बावजूद प्रिंसिपल का न तो स्केल मिलेगा और न ही अन्य वित्तीय लाभ मिलेंगे।

वर्तमान में हेडमास्टर और लेक्चरर को 10,300 पे बैंड और 5400 ग्रेड पे मिल रहा है। जबकि प्रिंसिपल का पे बैंड 15600 से 40 हजार तक और 6600 ग्रेड पे हैं जो इन शिक्षकों को नहीं मिलेगा।  

विभाग ने इस मामले में शिक्षकों को कोर्ट का हवाला देते हुए बिना डीपीसी के ही प्रमोशन देने की मजबूरी जताई है। विभाग का कहना है कि एक्स सर्विसमेन कोटे वाले शिक्षक सेना के कार्यकाल को हाईकोर्ट ने शिक्षकों की सिनियोरिटी में न देने की बात कही थी।

जिसके विरोध में एक्स सर्विसमेन  शिक्षक सुप्रीम कोर्ट चले गए जहां मामला विचाराधीन है और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से 14 अगस्त 2013 को प्रमोशन को स्टे करवा दिया।
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शिक्षकों के साथ न्याय करें सरकार

विरेंद्र चौहान अध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ ने कहा कि डीपीसी के माध्यम से नियमित पदोन्नतियां होनी चाहिए। शिक्षा सचिव और निदेशक ने 14 अगस्त 2013 से अब तक इस संदर्भ में कोई कार्यवाही नहीं की है। विभाग की नियत साफ होती तो हाईकोर्ट में एक दायर कर स्टे वेकेंट कर सकता था।

एडिशनल सेक्रेटरी एजूकेशन से भी मांग की गई है कि सरकार शीघ्र इस मामले में स्टे वेकेट करें और शिक्षकों के साथ न्याय करें।

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