केंद्रीय योजनाओं के तहत शिक्षा विभाग को जारी होने वाला पैसा अब लैप्स नहीं होगा। साल 2016-17 के बजट में योजनाओं के लिए हिमाचल के शेयर का पुख्ता बंदोबस्त किया जाएगा, ताकि केंद्र से राशि जारी होते ही हिमाचल भी अपना हिस्सा फौरन दे सके।
शिक्षा विभाग के बजट में गुणात्मक शिक्षा और विद्यार्थियों के ड्रॉप आउट को रोकने के लिए विशेष इंतजाम किया जाएगा। साल 2016-17 का बजट बनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। मंगलवार को शिक्षा विभाग के बजट को बनाने के लिए पहली बैठक हुई। अध्यक्षता अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा पीसी धीमान ने की।
इसमें उच्च शिक्षा, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बुधवार को वित्त विभाग के साथ शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक होगी। वित्तीय वर्ष 2016-17 के बजट में शिक्षा विभाग हिमाचल के शेयर को अलग से दर्शाएगा। मंगलवार को हुई बैठक में फैसला लिया गया कि विभिन्न केंद्रीय योजनाओं में हिमाचल के 30 प्रतिशत शेयर का अलग कॉलम बनाया जाएगा।
इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में आसानी होगी। केंद्र का 70 प्रतिशत शेयर मिलते ही हिमाचल का शेयर जोड़कर योजनाओं को लागू कर दिया जाएगा। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा में दाखिला लेने वाले छात्र को दसवीं तक सहेजकर रखने का फैसला भी लिया गया।
इसके लिए स्कूलों के बजट में विशेष प्रावधान किया जाएगा। गुणात्मक शिक्षा देने के लिए भी बजट में प्रावधान किया जाएगा। सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम बेहतर बनाने, मेरिट में अधिक से अधिक छात्रों को शामिल करने के लिए भी विशेष योजनाएं तैयार की जाएंगी।