स्कूली खेलकूद प्रतियोगिता में खिलाड़ियों की सुरक्षा को देखते हुए शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ी अब निजी और व्यावसायिक वाहनों में नहीं जाएंगे। अगर ऐसा हुआ तो शिक्षकों और स्कूल प्रभारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
खिलाड़ियों को अब सार्वजनिक परिवहन के वाहनों में प्रतियोगिता के लिए ले जाना होगा। बीते साल मंडी में मालवाहक वाहन में 22 छात्राओं के सफर करने पर संज्ञान लेते हुए यह फैसला लिया गया है। इसके अलावा खिलाड़ी छात्राओं के साथ एक महिला शिक्षक को भेजना भी अनिवार्य किया गया है। शनिवार को उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने इस बाबत सभी उपनिदेशकों को निर्देश जारी किए।
एडीएम मंडी की ओर से उच्च शिक्षा निदेशालय को बताया कि बीते साल अंडर 19 टूर्नामेंट में शामिल होने वाली 22 छात्रा खिलाड़ियों को मालवाहक वाहन में सफर करते हुए पाया गया। इनके साथ शिक्षक भी इसी वाहन में सवार थे। एडीएम की रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह से सफर करने से स्कूली छात्राओं की जान खतरे में पड़ सकती है। एडीएम मंडी की इस रिपोर्ट पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उच्च शिक्षा निदेशक ने शनिवार को स्कूली बच्चों की सुरक्षा से संबंधित दिशा निर्देश जारी किए हैं।
उपनिदेशकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि खिलाड़ियों को सार्वजनिक परिवहन वाहनों में भी सफर करवाया जाएगा। इस दौरान शिक्षक भी साथ में रहे। एक टीम के साथ दो शिक्षक अनिवार्य तौर पर रहे। छात्रा खिलाड़ियों के साथ एक महिला शिक्षक अनिवार्य तौर पर साथ रहे। महिला शिक्षक को इन खिलाड़ियों के साथ रात में भी रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दिशा निर्देशों का पालन नहीं करने वाले शिक्षकों और स्कूल प्रभारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।