प्रदेश के गरीब परिवारों के बच्चों, जो आवश्यक संसाधनों के अभाव में व्यवसायिक और तकनीकी पढ़ाई कर पाते हैं, उन्हें उच्च शिक्षा के लिए सरकार की ओर से वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकार ने इसके लिए 200 करोड़ के बजट प्रावधान से मुख्यमंत्री विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना शुरू करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि गरीब बच्चों को एक फीसदी ब्याज पर इंजीनियरिंग, मेडिसन, एमबीए, पीएचडी, आईटीआई, पॉलीटेक्निक, बी फार्मेसी और नर्सिंग सहित अन्य व्यवसायिक कोर्स के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। इससे पैसों के अभाव में कोई भी मेधावी गरीब बच्चा उच्च शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा।
यौन अपराधों को लेकर बच्चों को किया जाएगा जागरूक
प्रदेश सरकार ने बच्चों को यौन अपराधों के लेकर जागरूक करने का फैसला भी लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान को चलाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। प्रदेश में नशीली दवाओं और मादक द्रव्यों के सेवन के दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने व बच्चों और युवाओं में इनके नुकसान के बारे में जागरुकता लाने के लिए नशा एवं मादक पदार्थ मुक्त हिमाचल अभियान शुरू किया जाएगा।
अर्थशास्त्री -प्रो. एनके शारदा ने कहा कि देश में सत्तासीन हुई कांग्रेस की सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार के पहले वार्षिक बजट में आम जनता को दी गई दस गारंटियों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। इन गारंटियों को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए भारी ऋण के बोझ के तले दबी कांग्रेस सरकार को अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाना एक बड़ी चुनौती रहेगी। बजट में इस दिशा में उठाए गए कदम अपर्याप्त नजर आ रहे हैं। पांच लाख युवाओं को रोजगार सृजन का लक्ष्य भी आसान नहीं होगा। कर्मचारी और पेंशनभोगियों के सहारे सत्ता में आई कांग्रेस की सरकार के इस पहले बजट में कर्मचारी वर्ग के लिए कोई बड़ी राहत का प्रावधान नहीं है, जिससे यह वर्ग अपने को ठगा सा महसूस कर रहा है। बजट में आम जनता पर किसी तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ टैक्स के रूप में न डाला जाना राहत दे रहा है, मगर बजट में की गई घोषणाओं को पूरा करने को वित्तीय संसाधन किस तरह से जुटाए जाएंगे, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मुख्यमंत्री ने सामाजिक सुरक्षा के तहत अनाथ, असहाय लोगों व महिलाओं के कदम उठाकर राहत देने का प्रयास किया है। सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार लाने की दृष्टि से हर विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल खोलने की घोषणा अच्छा कदम साबित हो सकता है, मगर उच्च शिक्षा क्षेत्र को लेकर कोई महत्वपूर्ण घोषणा बजट में नहीं है। सरकार ने पर्यावरण की दृष्टि से डीजल की जगह चरणबद्ध तरीके से 1,500 ई बसें चलाने का निर्णय लेकर प्रदेश को हरित राज्य बनाने के लिए अच्छी पहल की है। सरकार के इस बजट में कांग्रेस की ओर से दी गई पांच लाख नौकरियों की गारंटी को देखते हुए मात्र 25 हजार रोजगार सृजित करने की बात है, जो युवाओं के लिए निराशाजनक है। निजी क्षेत्र में 20,000 करोड़ के निवेश से प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार देने की बात है। इसका धरातल पर उतरना अत्यंत कठिन लगता है।
उपदान देने का कदम मददगार साबित होगा
बजट में युवाओं को स्वरोजगार के लिए ई बस और ई ट्रक खरीदने को उपदान देने का कदम मददगार साबित हो सकता है। सुक्खू सरकार के इस बजट में कांगड़ा और मंडी के हवाई अड्डों के विस्तार की योजना को केंद्र के आर्थिक सहयोग के बिना कार्यान्वित करना कठिन होगा। कांगड़ा को पर्यटन राजधानी बनाने का वादा भी किया गया है। कृषि, बागवानी, दुग्ध उत्पादन की कई योजनाएं शुरू करने की घोषणााएं पूरी होने से ग्रामीण जनता के लिए लाभकारी साबित होंगी।