साथ ही तारणी इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रबंध निदेशक वकमुला चंद्रशेखर और रामप्रकाश भाटिया को भी आरोपी बनाया गया है। बता दें कि मनी लांड्रिंग में ही सीबीआई द्वारा दायर एक अन्य मामले में भी हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी, चौहान और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।
इन दोनों ही मामलों में अब तक वीरभद्र और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। बीमा एजेंट आनंद चौहान को ईडी ने नौ जुलाई 2016 को धनशोधन निरोधक अधिनियम-2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था। बाद में दो जनवरी को उन्हें जमानत दे दी गई थी।
सीबीआई में चल रहे आय से अधिक संपत्ति के मामले पर संज्ञान लेते हुए ईडी ने इसी में आगे मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। आरोप है कि एलआईसी एजेंट आनंद चौहान ने वीरभद्र सिंह से करीब 5.14 करोड़ रुपये कैश लिया
जिसे पंजाब नेशनल बैंक के अपने खाते में जमा करवाया और उसके बाद वीरभद्र और अपने परिवारवालों के नाम पर बीमा पॉलिसी खरीद कर निवेश कर दिया। बैंक खाते में मोटी रकम जमा होने के कारण वह आयकर विभाग की नजर में आ गया।
मैहरोली में प्लॉट की खरीद-फ रोख्त की कड़ी भी इसमें जुड़ी। ईडी के मुताबिक कमाई का स्रोत स्पष्ट नहीं हुआ, जबकि वीरभद्र सिंह ने इसे सेब बगीचे की कमाई बताया। इसी से सारा मामला शुरू हुआ।