इसमें बताया गया है कि चैथला गांव की वन भूमि के मामले में राजस्व व वन अधिकारी बड़े अवैध कब्जाधारियों से मिले हुए हैं। यह अधिकारी बाकायदा कब्जाधारियाें की मदद कर रहे हैं।
आंकड़ों से कोर्ट को गुमराह करने के लिए केवल छोटे कब्जाधारियों पर ही कार्रवाई हो रही है। पत्र में कई लोगों के नामों का उल्लेख कर बताया गया है कि किसके पास कितनी अवैध भूमि पर कब्जा है।
प्रदेश उच्च न्यायालय ने जिलाधीश शिमला को आदेश दिए हैं कि वह एसआईटी को मदद करने के लिए कुशल व तकनीकी तौर पर काबिल लोगों को तैनात करें। प्रधान मुख्य अरण्यपाल ने न्यायालय को बताया कि अवैध कब्जे हटाने के लिए केवल 125 कर्मियों को तैनात किया गया है।
न्यायालय ने पाया कि अवैध कब्जों की संख्या को देखते हुए इनकी संख्या बहुत कम है। जिस पर न्यायालय ने भारतीय सेना के जवानों को भी तैनात करने के आदेश पारित कर दिए।
मामले पर अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी। इसके अलावा न्यायालय ने 24 जुलाई को एक्शन रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष दायर करने के आदेश पारित किए हैं।