उक्त प्रधानाचार्या ने अप्रैल 2017 में सेवानिवृत्त होना था लेकिन राज्य शिक्षक अवार्ड मिलने के कारण उसे सरकार की तरफ से एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया गया। प्रार्थी ने याचिका में आरोप लगाया है कि राज्य सरकार द्वारा पारित फैसला कानून की दृष्टि से गलत है।
अवार्ड वापस लेने के फैसले से पूर्व उसे सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए था। प्रार्थी के अनुसार यह फैसला एक तरफा है। इस कारण इसे रद्द किया जाना चाहिए। ट्रिब्यूनल ने प्रार्थी की दलीलों से प्रथम दृष्टया सहमति जताते हुए अवार्ड वापस लेने के आदेश पर रोक लगा दी है।