बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा उत्सव शनिवार को राजधानी शिमला में धूमधाम से मनाया गया। जाखू में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने रिमोट से पुतले फूंके। भारी संख्या में शहर के लोग दशहरा उत्सव का आनंद उठाने के लिए जाखू पहुंचे।
जाखू मंदिर में दशहरा उत्सव के लिए रावण (45फीट), कुंभकर्ण (40) और मेघनाद (40 फीट) के पुतले तैयार किए गए थे। रावण दहन से पहले झांकियां जाखू पहुंची और जय श्री राम के उद्घोष गूंज उठे। झांकियों के जरिये राम-रावण युद्ध के दृश्य दर्शाए गए।
दशहरे के अवसर पर जाखू में लोगों के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया था। लोगों को जलेबी और पकौड़े भी बांटे गए। शाम के समय शहर में जगह जगह रावण, मेघनाद और कुंभ कर्ण के पुतले फूंके गए। इस दौरान शहर पटाखों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
इस मौके पर उपायुक्त रोहन चंद ठाकुर, एसपी सौम्या, मानसी सहाय, जाखू मंदिर के ट्रस्टी सुमनपाल दत्ता, अशोक सूद, सतीश कपूर, राजेश शर्मा, राकेश पुरी, महेंद्र चौहान, विशाल सूद, हरजीत सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
बालूगंज में फूंका 50 फुट का रावण
दशहरे के अवसर संकटमोचन मंदिर परिसर में भी रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले फूंके गए। वहीं बालूगंज में रावण का 50 फुट ऊंचा पुतला फूंका गया। इसके अलावा कुंभ कर्ण और मेघनाद का 40-40 फीट ऊंचा पुतला भी जलाया जाएगा। बालूगंज वेलफेयर सोसायटी के उपप्रधान विनय पुरी ने बताया कि पुतलों का दहन करने से पहले झांकियां भी निकाली गई।
पूरे शहर में आतिशबाजी, धुंआ धुंआ हुआ शिमला
दशहरे के उपलक्ष्य पर शनिवार शाम पांच बजे शहर के अलग अलग इलाकों में रावण दहन शुरू हो गया। सबसे पहले जाखू में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले जलाए गए।
इसके बाद संकटमोचन, समरहिल, झंझीड़ी और कनलोग में भी रावण दहन हुआ। शहरभर में देर रात तक आतिशबाजी और पटाखे चलाने का सिलसिला जारी रहा। इससे शहर धुंए से भर गया। शहरभर में राख और कागज के टुकड़े फैल गए।