बुजुर्ग को पालकी में उठाकर ले जाते लोग
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हिमाचल के बिलासपुर के सदर विस क्षेत्र की धार टटोह पंचायत के जुरासी गांव में लोग कई दशकों से सड़क सुविधा की लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन अभी तक उन्हें इससे महरूम ही रहना पड़ा है। सड़क न होने से बीमार लोगों को पालकी में बिठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। ऐसा ही एक वाकया शुक्रवार को गांव में सामने आया। उल्लेखनीय है कि इस गांव की मुख्य सड़क से दूरी लगभग पांच किलोमीटर की है। वहीं, इसकी आबादी हजारों में है। पिछले एक सप्ताह से गांव के एक बुजुर्ग दलेल सिंह (80) बीमार चल रहे थे।
लेकिन सड़क सुविधा न होने के कारण परिवार वालों ने उन्हें घर पर ही दवाई देना उचित समझा। लेकिन शुक्रवार को हालात इतने गंभीर हो गए कि बुजुर्ग को अस्पताल लाना पड़ा। इन्हें अस्पताल लाने के लिए गांव से सड़क तक लोगों ने इन्हें पालकी में उठाकर पहुंचाया। जहां आज के दौर में लोग खाली पांच किमी पैदल सफर नहीं कर पाते हैं। इस गांव के ग्रामीणों को इस तरह के हालातों का अक्सर सामना करना पड़ता है।
धार टटोह युवक मंडल प्रधान कुलदीप ठाकुर ने बताया कि उन्होंने गांव वालों के साथ मिलकर कई बार प्रशासन से इस गांव के लिए सड़क बनवाने की मांग की। हालांकि पिछले कई सालों से सड़क के निर्माण के लिए पैसा भी आया है। लेकिन विभाग की लापरवाही इस हद तक है कि सात वर्षों में उस सड़क के लिए वन विभाग की एनओसी नहीं मिल पाई है। प्रशासन की लापरवाही का भुगतान जनता को करना पड़ रहा है।
हमने कई बार जिला प्रशासन से गांव के लिए सड़क मार्ग बनवाने की मांग की है। लेकिन, कहीं कोई सुनवाई नहीं होती है। गांव की हजारों की आबादी को आपात के समय पांच किमी सफर कर पैदल सड़क तक पहुंचना पड़ता है। सरकार की कथनी और करनी में दिन-रात का फर्क है। लोगों को मूलभूत सुविधाएं भी सरकार मुहैया नहीं करवा पा रही है। -निशा ठाकुर, ग्राम पंचायत प्रधान धार-टटोह