हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में गहराए पेयजल संकट पर प्रदेश हाईकोर्ट की सख्ती के दूसरे ही दिन मंगलवार को सप्लाई पांच एमएलडी तक बढ़ गई। मंगलवार को सभी पेयजल परियोजनाओं से शिमला शहर को 41.07 एमएलडी पानी मिला। बीते एक हफ्ते में पहली बार 40 एमएलडी से अधिक पानी मिला है। शहर के लिए पानी की सप्लाई बढ़ने के बाद कंपनी ने भी सभी जोन में तय शेड्यूल के अनुसार लोगों को पानी दे दिया है। बुधवार को भी तय शेड्यूल के मुताबिक पानी देने के निर्देश हैं। पेयजल कंपनी के जीएम आरके वर्मा का कहना है कि शहर के लिए सप्लाई बढ़ी है। लोगों को अब तीसरे दिन हर हाल में पानी दिया जाएगा।
बुधवार को इन क्षेत्रों में मिलेगी आपूर्ति
बुधवार को शहर के नाभा, फागली, मैहली, शकराला, विकासनगर, शिवनगर, देवनगर, आंजी, छोटा शिमला, खलीनी, राजभवन, कसुम्पटी बाजार, चलौंठी, ढींगूधार, अपर समिट्री, मशोबरा वन, हिपा, ढली टनल, नेरीधार, भट्ठाकुफर, नवबहार, मल्याणा, जाखू, अनाडेल, कैथू, समरहिल, कामनादेवी, घोड़ाचौकी, टुटीकंडी, रुल्दूभट्ठा, कालीबाड़ी, कृष्णानगर, लोअर बाजार, रामबाजार, सब्जी मंडी, मेट्रोपोल क्षेत्र में पानी की सप्लाई दी जाएगी।
सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जलसंकट
शिमला शहर में चल रहा जलसंकट सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है। लोग अपने क्षेत्रों में पानी न आने, टैंकरों, हैंडपंपों के बाहर लाइन लगने की फोटो शेयर कर रहे हैं। निगम के कई पार्षद भी वार्डों में टैंकरों से सप्लाई मिलने के साथ साल 2018 में जलसंकट के फोटो शेयर कर रहे हैं। विपक्षी पार्टियां जल संकट के लिए सरकार और नगर निगम को निशाने पर ले रही हैं।
हाईकोर्ट ने शिमला जलसंकट पर पेश आंकड़ों पर जताया असंतोष
वहीं, राजधानी शिमला में पेयजल संकट मामले में प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला जल प्रबंधन निगम के अधिकारियों की ओर से पेश किए आंकड़ों पर असंतोष जताया है। राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 45 फीसदी पानी नगर निगम कार्यालय, सार्वजनिक शौचालयों और अन्य जन सुविधाओं के लिए ही लग जाता है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने इस पर हैरानी जताते हुए शिमला जल प्रबंधन निगम को आदेश दिए हैं कि अदालत के समक्ष विस्तृत आंकड़े पेश करें। इस मामले कि सुनवाई आगामी 22 जून को निर्धारित की गई है। शिमला जल प्रबंधन निगम मंगलवार को अदालत की ओर से पूछे गए सवाल का जवाब देने में असमर्थ रहा। खंडपीठ ने पूछा था कि जब स्रोतों से 32 एमएलडी पानी उठाया जा रहा है तो उस स्थिति में वैकल्पिक दिन में पानी क्यों नहीं छोड़ा जा रहा है। अदालत ने शिमला जल प्रबंधन निगम के अधिकारियों से यह भी पूछा था कि यदि गर्मी के कारण केवल 32 एमएलडी पानी ही उठाया जा रहा है तो आठ एमएलडी कहां जा रहा है।