हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में पेयजल आपूर्ति लगातार छठे दिन मंगलवार को भी ठप रही। परियोजनाओं से राजधानी के लिए आपूर्ति शुरू न होने से शहर में कुछेक जगह मंगलवार को टैंकरों से पानी बांटा गया। कई वार्ड ऐसे भी हैं जहां मांग के बावजूद देर शाम तक टैंकर नहीं पहुंचे। लोग बाल्टियां लेकर सड़कों पर टैंकर का इंतजार करते रहे। उधर छोटा शिमला वार्ड में भी छठे दिन पानी नहीं आया तो यहां मंगलवार दोपहर 12:00 बजे टैंकर भेजा गया। टैंकर आता देख लोग बाल्टियां लेकर दौड़ पड़े।
मौके पर ऐसी मारामारी मची कि महिलाओं से लेकर छोटे बच्चे भी खाली डिब्बे लेकर पानी भरने के लिए लाइन में लग गए। महिलाओं ने कहा कि छह दिन से पानी नहीं आया है। बच्चे नहा नहीं पा रहे। घर पर खाना बनाने तक के लिए पानी नहीं है। मौके पर पहुंचे महापौर सुरेंद्र चौहान, उपमहापौर उमा कौशल ने खुद लोगों को बुलाकर पानी भरवाया। दोनों ने छोटा शिमला, स्ट्राबरी हिल्स, ब्रॉकहास्ट समेत कई इलाकों में टैंकर के साथ जाकर भी लोगों को पानी भरवाया। सांगटी वार्ड के हाउसिंग बोर्ड कालोनी, जाखू में भी पार्षदों ने टैंकरों से लोगों को पानी की आपूर्ति दी है।
कालोनियों के भीतर नहीं जा रहे टैंकर, लोग परेशान
शहर में कंपनी टैंकरों से पानी की आपूर्ति तो दे रही है, लेकिन इसका फायदा आवासीय कालोनियों के भीतर और सड़क से दूर के भवनों में रहने वाले लोगों को नहीं मिल रहा। दरअसल, वार्डाें में सड़कें तंग होने और अवैध पार्किंग के कारण टैंकर कालोनियों के भीतर तक आवाजाही नहीं कर पा रहे। विकासनगर के लिए सोमवार शाम कंपनी ने टैंकर भेजा था लेकिन तंग सड़क के चलते यह वार्ड के अंदर नहीं जा पाया। मंगलवार को भी छोटा शिमला, संजौली समेत कई वार्डाें में टैंकर रिहायशी इलाकों तक नहीं पहुंच पाए।
लोग बोले, खरीदकर पी रहे पानी
छोटा शिमला आयुर्वेदिक अस्पताल के पास रहने वाली आरती ने कहा कि छह दिन से पानी नहीं आया है। बच्चों को नहाना या कपड़े धोना तो दूर, अब खाना बनाने के लिए भी पानी नहीं बचा है। अब टैंकर से पानी ढो रहे हैं।
ब्रॉकहास्ट क्षेत्र में रहने वाले रोहित ने बताया कि घर पर पानी की टंकियां खाली हैं। पानी कब आएगा, इसका कोई पता नहीं। इसलिए टैंकर से बाल्टियां भरी हैं। कंपनी को पानी देने की कोई व्यवस्था करनी चाहिए।
छोटा शिमला की सुषमा सूद ने कहा कि पेयजल आपूर्ति न होने से भारी परेशानी झेल रहे हैं। पूरे शहर में दिक्कत है। काफी सालों बाद शिमला में ऐसी परेशानी आई है। सरकार को इस पर कदम उठाने चाहिए।
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