मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल निर्माता डॉ. वाईएस परमार की जयंती महज रस्म अदायगी ही नहीं होनी चाहिए। विधानसभा परिसर के एक छोटे से कमरे में एक घंटे में ही यह आयोजन निपटा देना न्यायोचित नहीं है। वह विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्ताव रखते हैं कि आगे से डॉ. परमार की जयंती पर बड़ा समारोह हो।
जयराम बोले कि डॉ. परमार को किसी पार्टी से जोड़कर देखने के बजाय हिमाचल निर्माता के तौर पर देखा जाना चाहिए। यह बात मुख्यमंत्री ने प्रदेश विधानसभा परिसर में डॉ. वाईएस परमार की जयंती पर समारोह में कही। उन्होंने डॉ. परमार की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धासुमन भी अर्पित किए।
शनिवार सुबह 10 बजे के बाद आयोजित समारोह में सीएम के संबोधन से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने डॉ. वाईएस परमार के विचारों और योगदान से अवगत करवाया। बिंदल का भाषण पूरा होते ही मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. परमार में हिमाचली संस्कृ ति की रूह बसती थी।
उनकी जयंती पर विधानसभा परिसर में एक घंटे का आयोजन न्यायसंगत नहीं लगता है। यह उनकी निजी पीड़ा भी हो सकती है। वह विधानसभा अध्यक्ष से प्रस्ताव करते हैं कि इस बारे में भविष्य में गंभीरता से सोचने की जरूरत है। बाद में विधानसभा के उपाध्यक्ष हंसराज ने कहा कि इस पर जरूरत चिंतन होगा।
इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री, डॉ. वाईएस परमार के बेटे कुश परमार, दो पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राधारमण शास्त्री, गंगूराम मुसाफिर समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
बिंदल बोले - वीरभद्र जी, हमने आपको भी पत्र लिखा है
सीएम के भाषण से पहले विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि विधानसभा में एक नॉलेज बैंक तैयार किया जा रहा है। इसमें डॉ. परमार के तमाम वक्तव्य एकत्र किए जा रहे हैं।
इस बारे में 2200 पृष्ठों का एक वॉल्यूम तैयार कर दिया गया है। इसमें से महत्वपूर्ण चीजें छांटी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए विधायकों, पूर्व विधायकों और तमाम प्रमुख लोगों की राय ली जा रही है। सामने बैठे पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर इशारा करते हुए कहा डॉ. बिंदल ने कहा - वीरभद्र जी! हमने आपको भी पत्र लिखा है।