प्रदेश के करीब 1500 मेडिकल ऑफिसरों की दो घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक शनिवार को भी जारी रही। सुबह साढ़े नौ से साढ़े ग्यारह बजे तक हड़ताल के चलते प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी पूरी तरह प्रभावित है। हाल यह है कि शनिवार को तीमारदार मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक लेकर दौड़ते रहे लेकिन हड़ताल का हवाला देते हुए डॉक्टरों ने मरीजों को हाथ तक नहीं लगाया।
वहीं, डाक्टरों की हड़ताल से भले ही आम लोग बेजार हो रहे हो लेकिन सरकार के किसी भी नुमाइंदे के पास हड़ताली डाक्टरों से बात करने का समय नहीं है। प्रधान सचिव स्वास्थ्य ने पहले ही दिल्ली में बड़ी मीटिंग का हवाला देते हुए 7 फरवरी से पहले बातचीत करने का समय न होने की बात कह दी है। खास बात यह है कि 7 फरवरी को भी शाम को बैठक होगी जिसका सीधा मतलब यह है कि सुबह डाक्टर हड़ताल के बाद ही बैठक में जाएंगे।
वहीं, स्वास्थ्य मंत्री की भी चिंताएं सिर्फ बयानों तक सीमित हैं। हालात यह हैं कि तीमारदार मरीज को दिखाने के लिए एक से दूसरे अस्पताल भटक रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। वहीं, सुनवाई न होने और मांगें न माने जाने से नाराज डाक्टर हड़ताल पर अड़े हुए हैं। डाक्टरों का कहना है कि सरकार को न तो डाक्टरों की चिंता है और न ही आम लोगों से कोई वास्ता है।
यही कारण है कि हड़ताल के कई दिन पहले नोटिस के बावजूद किसी अधिकारी या मंत्री को बातचीत का समय नहीं मिला। मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष डा जीवानंद चौहान ने कहा कि सरकार जब तक उनकी मांगों को नहीं मानेगी, हड़ताल जारी रखेंगे। साथ ही यह भी कहा कि एक भी डॉक्टर का वेतन काटा गया तो सरकार को इसका भी जवाब दिया जाएगा।
वहीं, प्रदेश के 1500 डॉक्टरों की हड़ताल के बीच प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना केंद्र सरकार के अफसरों के साथ एक जरूरी मीटिंग के लिए दिल्ली चले गए हैं। ऐसे में अब 7 फरवरी से पहले बातचीत के सारे दरवाजे बंद हो गए हैं। वहीं, स्वास्थ्य सेवा निदेशालय ने डाक्टरों की हड़ताल पर हाथ खड़े कर दिए हैं। बताते चलें कि सरकारी डाक्टरों ने 13 फरवरी तक हर रोज सुबह दो घंटे की पेन डाउन हड़ताल का एलान किया है। इस हड़ताल की वजह से समूचे प्रदेश में ओपीडी नहीं चल रही है, जिससे मरीजों और तीमारदारों को जबरदस्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।