सरकार के बातचीत के ऑफर के बावजूद प्रदेशभर के करीब 1500 मेडिकल आफिसर दो घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक पर चले गए। मेडिपर्सन एक्ट लागू करने समेत कई मांगों को लेकर आंदोलनरत डाक्टरों की हड़ताल के पहले ही दिन समूची स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई। स्वास्थ्य विभाग के लाख दावों के बावजूद तीमारदार मरीज दिखाने के लिए सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटते नजर आए।
प्रदेश के हमीरपुर, शिमला, मंडी, सोलन, रामपुर, कुल्लू, चंबा के तकरीबन सभी छोटे बड़े सरकारी अस्पतालों में डाक्टर पेन डाउन हड़ताल पर रहे। ‘भगवान’ के न पसीजने के कारण गरीब लोगों को निजी अस्पतालों व क्लीनिकों का रुख करना पड़ा। वहीं, डाक्टरों की हड़ताल के बावजूद स्वास्थ्य विभाग डाक्टरों के खुद मानने की आस लगाए हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना ने मेडिपर्सन एक्ट लागू करने के लिए विधानसभा सत्र तक डाक्टरों को इंतजार करना जरूरी है। कहा कि बिना विधानसभा जाए कोई भी एक्ट लागू नहीं हो सकता। ऐसे में डाक्टरों को खुद विधानसभा सत्र तक हड़ताल को स्थगित कर देना चाहिए।
वहीं, मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जीवानंद चौहान ने फिर दोहराया कि यह मांग पिछले एक साल से की जा रही है। कहा कि एक महीने पहले सरकार को हड़ताल का नोटिस दिया था। फिर भी उनकी मांगों को लेकर कोई रुचि नहीं दिखाई गई। कहा कि सरकार चाहती तो बैठक पहले बुला लेती लेकिन वह खुद आम लोगों का हित नहीं चाहती।