प्रदेश में किसानों और बागवानों की मेहनत बरबाद नहीं जाएगी। मिट्टी की परख के हिसाब से किसान और बागवान अपने खेत-खलियान में पैदावार कर सकेंगे। इससे जहां किसानों की मेहनत रंग जाएगी, वहीं मार्केट में उन्हें अपने उत्पाद के अच्छे दाम मिल सकेंगे। मिट्टी की जांच के लिए कृषि विभाग ने मृदा टेस्टिंग मशीनें खरीदी हैं।
यह मशीनें लोगों के खेत तक जाएंगी। मौके पर ही विशेषज्ञ किसानों और बागवानों को मिट्टी के हिसाब से फसल उगाने के तरीके बताएंगे। हिमाचल में अभी मौसम के हिसाब से फसलों की बिजाई की जाती है। प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गेहूं, मक्की, जौ, मटर, गोभी, सेब, टमाटर की फसलें उगाई जाती हैं, जबकि मैदानी इलाकों में अदरक, गेहूं, धान, मक्की, गन्ना, जौ, सरसों, अलसी, आलू, प्याज और लहसुन आदि फसलें उगाई जाती है।
हिमाचल के कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां पानी की समस्या है। वहां के लोगों कड़ी परिश्रम के बाद भी अच्छे फसल के लिए तरस जाते हैं। मंडी, सिरमौर, बिलासपुर, ऊना और शिमला जिले के अधिकांश क्षेत्र में किसानों की यह समस्या है कि उन्हें कई बार फसलों के बीज के लिए लगाया गया पैसा भी नहीं मिल पाता है।
चूंकि हिमाचल के यह ऐसे क्षेत्र हैं जो मौसम पर निर्भर हैं। सीपीएस (कृषि) रोहित ठाकुर ने कहा कि महकमे ने मृदा टेस्टिंग मशीनें खरीद ली हैं। इन मशीनों से मिट्टी की जांच की जाएगी। किसानों को मौके पर बताया जाएगा कि उनकी जमीन में किस फसल की पैदावार की जा सकती है।