स्वास्थ्य खंड मार्कंडेय की पीएचसी बागी सुंगल में तैनात चिकित्सक डॉक्टर वरुण 15 महीनों में कंटेनमेंट जोन से कोविड के सैंपल जुटाए हैं। इतना ही नहीं इन्होंने कोविड केयर सेंटर में भी मरीजों के सैंपल लिए और होम आइसोलेट मरीजों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें टेली मेडिसिन से सलाह दी।
चंबा जिले में कोरोना जांच के लिए पहला सैंपल लेने वाले एमडी डॉ. संजय कश्यप आज भी कोविड में सेवाएं दे रहे हैं। वह पिछले कई महीनों से घर नहीं गए हैं। ड्यूटी के बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से उपलब्ध करवाए गए आवास में रहे। कभी-कभार ही परिवार से मिलने गए। हालांकि, कोरोना की दूसरी लहर थमने के बाद प्रदेश और जिले में हालात सामान्य हुए हैं। ऐसे में डॉक्टरों को भी थोड़ी राहत मिली है।
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डॉ. संजय कश्यप डेढ़ साल से कोरोना काल में सेवाएं दे रहे हैं। अन्य बीमारी से ग्रस्त मरीजों को भी फोन पर परामर्श देते हैं। कोविड से पहले उनसे उपचार करवाने वाले कई मरीज आज भी इलाज के संबंध में उन्हें फोन करते हैं। कोविड ड्यूटी होने के कारण ओपीडी में नहीं बैठ पा रहे हैं। इस कारण मरीजों को फोन पर ही परामर्श दे देते हैं। अगर कोई मरीज गंभीर बीमार हो तो उसे ओपीडी में जाकर दूसरे चिकित्सक से जांच करवाकर इलाज की सलाह देते हैं। कोविड का चंबा में पहला सैंपल डॉ. संजय ने ही लिया था। संवाद
डॉक्टर वरुण बने संकट के सिपाही
स्वास्थ्य खंड मार्कंडेय की पीएचसी बागी सुंगल में तैनात चिकित्सक डॉक्टर वरुण 15 महीनों में कंटेनमेंट जोन से कोविड के सैंपल जुटाए हैं। इतना ही नहीं इन्होंने कोविड केयर सेंटर में भी मरीजों के सैंपल लिए और होम आइसोलेट मरीजों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें टेली मेडिसिन से सलाह दी। डॉक्टर वरुण बताते हैं कि कोविड काल में जब मामले आना शुरू हुए तो लोग सहमे थे और चिकित्सक होने के नाते वो लोगों का हौसला बनकर उनके साथ डटे रहे।
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उस समय लोगों के लिए दवा से जरूरी सही जानकारी थी। बताया कि स्वास्थ्य खंड के कंटेनमेंट, कोविड केयर सेंटर में सैंपल लेने का दायित्व उनका और उनकी टीम का था। वहीं, अगर मरीजों को होम आइसोलेशन में कोई समस्या होती थी तो वो रात को किसी भी समय उन्हें फोन कर सलाह लेते थे। कहा कि इस कार्य को पूरा करने में उनकी ने भरपूर सहयोग किया। बताया कि उनकी टीम में लैब तकनीशियन अनीता शर्मा, चतुर्थ क्लास कर्मचारी रमेश शमिल रहे। पिछले 15 माह से कोई छुट्टी नहीं की है। डॉ. वरुण ने कहा कि इस दौरान 8 से 10 घंटे तक पीपीई किट में रहकर कार्य करना पहले मुश्किल होता था। संवाद
डेढ़ साल से 24 घंटे अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं डॉ. कालिया
स्वास्थ्य खंड भोरंज के बीएमओ डॉ. ललित कालिया पिछले डेढ़ साल से 24 घंटे अस्पताल परिसर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अपने पैतृक घर जाने की बजाए वह अस्पातल परिसर में बने आवासीय भवन में रह रहे हैं और कोविड काल मे बेहतरीन सेवाएं दे रहे हैं। इसी के परिणामस्वरूप स्वास्थ्य खंड भोरंज कोरोना सैंपल एकत्रित करने और वैक्सीनेशन करने में प्रदेशभर में अव्वल आया है।
जोगिंद्रनगर अस्पताल के चिकित्सकों को सलाम
जोगिंद्रनगर अस्पताल के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भुवनेश पंत और डॉ. सौरभ धरोच प्रतिनियुक्ति पर नेरचौक मेडिकल कॉलेज में संक्रमित मरीजों की सेवा में समर्पित रहे। करीब तीन माह तक बिना अवकाश उन्होंने कोविड अस्पताल में दाखिल मरीजों को स्वास्थ्य लाभ दिलाया। एसरकाघाट से संबंध से रखने वाले डॉ. भुवनेश पंत और हमीरपुर निवासी सौरभ धरोच ने कहा कि उनकी ड्यूटी सैंपलिंग में भी थी, जहां उन्होंने करीब पंद्रह हजार लोगों के सैंपल लिए। संवाद