डा. बिंदल ने अध्यक्ष बनने के बाद पीठ से सदन को पहले संबोधन में कहा कि सदन में दोनों ओर युवा नेतृत्व प्रदेश के लिए अच्छा रहेगा। इस बार सदन में बदला सा नजारा है। बीस वर्षों से दिख रहे लोग इस विधानसभा में नहीं हैं। नई सरकार युवा नेतृत्व के हाथ है।
उन्होंने कहा कि सदन में प्रतिपक्ष भी अनुभवी है। उन्होंने पहली बार चुनकर आए विधायकों को वरिष्ठता और परंपरा का ध्यान रखने की नसीहत भी दी। बिंदल बोले बतौर अध्यक्ष वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ सबका विकास सिद्धांत पर चलेंगे।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए नई सरकार के लिए उनकी कविता की पंक्तियां भी सुनाईं। उन्होंने कहा कि नई सरकार को पीछे की ओर नहीं देखना है। अपनी लंबी राजनीतिक यात्रा का जिक्र करते हुए वह कई बार भावुक भी हुए।
विधायकों को बोलने का दूंगा पूरा मौका : बिंदल
13वीं विधानसभा के अध्यक्ष बने विधायक डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के गरिमामय पद का लगातार दूसरी बार सर्वसम्मति से चुनाव अच्छी परिपाटी है। पिछली विधानसभा में भी अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल का चुनाव पक्ष-विपक्ष की सहमति से हुआ था और इस बार भी इस परिपाटी को आगे बढ़ाने के लिए विपक्ष ने भी पूरा समर्थन दिया है। इसके लिए वह विपक्ष के आभारी हैं। बिंदल ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उन्हें सदन चलाने की बड़ी जिम्मेदारी मिली है। इसका वे बखूबी निर्वहन करेंगे। बिंदल बोले- विधानसभा में विधायकों की आकांक्षाओं और जनहित के मसले उठाने के लिए पूरा अवसर दिया जाएगा।
जयवंत राम : 24 मार्च, 1952 से 31 अक्तूबर 1956
देशराज महाजन : 4 जनवरी 1963 से 18 मार्च 1967
देशराज महाजन : 20 मार्च 1967 से 19 मार्च 1972
कुलतार चंद राणा : 28 मार्च 1972 से 29 जून 1977
सरवण कुमार : 30 मार्च 1977 से 18 अप्रैल 1979
टीएस नेगी : 8 मई 1979 से 21 जून 1982
टीएस नेगी : 22 जून 1982 से 14 सितंबर 1984
विद्या स्टोक्स : 11 मार्च 1985 से 19 मार्च 1990
राधारमन शास्त्री : 21 मार्च 1990 से 17 अगस्त 1990
टीएस नेगी : 20 अगस्त 1990 से 14 दिसंबर 1993
कौल सिंह ठाकुर : 15 दिसंबर 1993 से 12 मार्च 1998
गुलाब सिंह ठाकुर : 30 मार्च 1998 से 7 मार्च 2003
गंगूराम मुसाफिर : 11 मार्च 2003 से 9 जनवरी 2008
तुलसी राम : 11 जनवरी 2008 से 1 जनवरी 2013
बीबीएल बुटेल : 9 जनवरी 2013 से दिसंबर 2017
वहीं सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि डॉ. बिंदल के अध्यक्ष के आसन पर चले जाने से उनकी सदन में सत्तापक्ष को कमी महसूस हो रही है। वे विपक्ष में थे तो बड़े जोशीले अंदाज में बात करते थे और सरकार में भी उनका योगदान अहम रहता था, लेकिन वे अब अध्यक्ष बने हैं तो उनका कार्यक्षेत्र बदल गया है
उन्होंने कहा कि जब राजीव बिंदल विद्यार्थी परिषद में थे, उस समय वे इनसे मिले थे। उनकी परेशानी से जूझ रहे लोगों की सेवा में रूचि थी और वे सेवाभाव के साथ काम करते थे और करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे निस्वार्थ कार्य करते रहे हैं।
सीएम ने कहा कि हिमाचल विधानसभा का गरिमामय इतिहास रहा है। यहां पर चर्चा का स्तर ऊंचा रहा है। यहां पर नए और अनुभवी लोग जीत कर आए हैं और विश्वास जताया कि सदन का स्तर वैसा ही बना रहेगा। उन्होंने विपक्ष से उम्मीद जताई कि उनका रचनात्मक सहयोग मिलता रहेगा।
विधानसभा में नए अध्यक्ष के पद पर डा. राजीव बिंदल की ताजपोशी के बाद उपाध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया नहीं हुई। सदन में वीरवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा से पहले उपाध्यक्ष का चुनाव होगा।
सत्ता पक्ष की ओर से बुधवार को चुराह के विधायक हंसराज के नाम का प्रस्ताव नए अध्यक्ष को दिया। विधानसभा उपाध्यक्ष पद पर हंसराज पार्टी की पहली पसंद हैं, लेकिन विक्रम जरियाल और सुखराम चौधरी के रेस में होने से पेच फंसा रहा।
इसी के चलते सत्ता पक्ष ने विपक्ष से उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी को लेकर कोई चर्चा नहीं की है। अब पार्टी ने अपना प्रत्याशी तय कर दिया है।
माना जा रहा है कि विपक्ष की ओर से उपाध्यक्ष पद के लिए कोई उम्मीदवार नहीं दिया जाएगा। नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि भाजपा के उपाध्यक्ष उम्मीदवार के खिलाफ हम कोई प्रत्याशी नहीं उतार रहे।