फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shimla News: पीड़िता अपने बयान से मुकरी पोक्सो मामले में डॉक्टर बरी

विज्ञापन
विज्ञापन
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
विज्ञापन

बोलीं, आपसी मनमुटाव और गुस्से में दर्ज कराई गई थी प्राथमिकी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। फास्ट ट्रैक कोर्ट पोक्सो शिमला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत ने दुष्कर्म और पोक्सो के तहत आरोपी डॉक्टर विनय जिष्टु को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मामले की मुख्य गवाह पीड़िता और उसके माता-पिता अदालत में अपने बयानों से मुकर गए।
विज्ञापन


पीड़िता ने बताया कि आरोपी डॉक्टर विनय जिष्टु से उसकी मुलाकात 2024 में आईजीएमसी के ओपीडी में उपचार के दौरान हुई थी। उस समय पीड़िता की उम्र 17 साल थी। इसके बाद दोनों में दोस्ती हो गई और वह विभिन्न स्थानों पर घूमने भी गए। पीड़िता ने अदालत में स्पष्ट किया कि उनके बीच कभी कोई शारीरिक संबंध नहीं बने थे। पीड़िता ने स्वीकार किया कि उसने आरोपी के खिलाफ शिकायत केवल गुस्से में आकर दर्ज करवाई थी। पीड़िता ने बताया कि उसने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि डॉक्टर ने उससे दूरी बनानी शुरू कर दी थी। बताया कि उस समय वह मानसिक रूप से अस्वस्थ थी और उसका मनोरोग संबंधी उपचार भी चल रहा था। पीड़िता के माता-पिता ने भी अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया और वह भी मुकर गए। वहीं अभियोजन पक्ष द्वारा एसएफएल जुन्गा से प्राप्त डीएनए रिपोर्ट को भी अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए माना कि जब पीड़िता ने स्वयं उस कपड़े को अपना मानने से इन्कार कर दिया है। केवल डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें