संजौली कॉलेज की इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल ने छात्रों को तनाव मुक्त रखने के लिए कार्यशाला लगाई। इसमें मुख्य वक्ता डा. राजकुमार ने बताया कि किस तरह से प्रतिस्पर्धा की दौड़ में शामिल हर व्यक्ति तनाव से ग्रस्त रहता है और उसे मानसिक शांति नहीं मिल पाती।
तनाव में रहने के कारण मनुष्य का मन और मस्तिष्क प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर सकता है। इससे कई तरह के मानसिक और शारीरिक रोग होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि भारत ही नहीं पश्चिम के देशों में भी यह समस्या बढ़ रही है।
इससे बचने के लिए योग, साधना और कठिन से कठिन हालात में अपने ऊपर संयम और मस्तिष्क पर नियंत्रण रखना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि तनाव ग्रस्त व्यक्ति चाह कर भी अपने कार्य में पूरा ध्यान नहीं लगा पाता है।
तनाव ग्रस्त व्यक्ति के लक्षण और उसका समय से उपचार करवाने के तौर तरीके भी छात्रों को बताए। उन्होंने मौजूद छात्रों को बताया कि किन योग और साधना की प्रक्रिया से व्यक्ति तनाव से मुक्त रह सकत है। इस दौरान छात्रों ने उनसे कई सवाल भी किए।
इस मौके पर कॉलेज की इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल की संयोजक भारती भागड़ा ने मुख्य स्रोत व्यक्ति का आभार जताया। डा. कामयनी बिष्ट ने भी छात्रों को तनाव मुक्त जीवन जीने के महत्व के बारे में जानकारी दी।