क्या गुड़िया को न्याय मिल पाया? प्रदेश के हर नागरिक के जहन में यह सवाल घूम रहा है। गुड़िया को न्याय दिलाने के लिए प्रदेश हर किसी ने गुस्सा जाहिर कर गुनाहगारों को तुरंत गिरफ्तार कर फांसी पर लटकाने की मांग की। शिमला पुलिस सवालों के घेरे में आ चुकी थी। यह प्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ जब इस केस ने पुलिस की छवि को गहरा आघात पहुंचाया। बढ़ते जनाक्रोश के बीच मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई ने एक गुनहगार और प्रदेश पुलिस अफसरों को गिरफ्तार कर अपनी पीठ खूब थपथपाई। क्या आज भी गुडि़या से दरिंदगी करने वाले खुले में घूम रहे हैं? इसका जवाब कोई भी जांच एजेंसी आज तक नहीं दे पाई।
गुड़िया दुष्कर्म मामले में सीबीआई की गिरफ्त में आए एकमात्र आरोपी को आखिर सजा सुना दी गई। लेकिन इस जघन्य अपराध के पीछे क्या केवल एक ही मुलजिम का हाथ था? इस बात को पचा पाना मुश्किल है। सीबीआई ने गुड़िया प्रकरण में गिरफ्तार किए गए संदिग्ध आरोपियों को यह कहकर रिहा करवा दिया कि इनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं। इस कांड के पीछे मुलजिम नीलू के अलावा और कौन था इस पर से देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी भी पर्दा नहीं उठा पाई। गुड़िया के साथ दरिंदगी सामने आने के बाद पूरा प्रदेश धरना प्रदर्शन से उबल रहा था। देश के कई हिस्सों में भी गुड़िया के न्याय के लिए शांति पूर्ण प्रदर्शन हुए। हिमाचल में विधानसभा चुनाव नजदीक थे लिहाजा इस मामले पर राजनीतिक दलों ने अपनी राजनीति भी खूब चमकाई। ठियोग और कोटखाई में जबरदस्त धरना प्रदर्शन हुए।