मुख्यमंत्री के आदेश पर जांच कर रहे तत्कालीन मंडलायुक्त दिनेश मल्होत्रा ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। 136 पन्नों की रिपोर्ट में पुलिस के स्तर से बरती लापरवाही के कई अहम खुलासे किए गए हैं।
मंडलायुक्त ने रिपोर्ट में 18 गवाहों के बयान शामिल किए हैं। मंडलायुक्त ने लापरवाही बरतने वाले लगभग डेढ़ दर्जन अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश भी की है।
गोलीकांड में महिला अधिकारी शैल बाला की मौके पर मौत हो गई थी, जबकि गुलाब सिंह ने पीजीआई में दम तोड़ दिया था। बाद में आरोपी को भी पुलिस ने 3 मई को वृंदावन से गिरफ्तार कर लिया था।
मंडलायुक्त शिमला की कसौली गोलीकांड पर जांच रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि पुलिस महकमे ने पूरी तरह से कोताही बरती है। सूत्रों के अनुसार मौके पर 14 पुलिस अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे। इसमें दो क्यूआरटी के जवान एके 47 से लैस थे।
इसके बावजूद आरोपी पर एक भी गोली नहीं चलाई गई। आरोपी विजय जब गोली चलाने के बाद भागा तो उसके पीछे सबसे पहले बिना हथियार के एसएचओ धर्मपुर दौड़े। इस कारण आरोपी को भागने का खुला मौका मिला।
मंडलायुक्त शिमला ने जांच में मौके पर मौजूद सभी प्रशासनिक अधिकारियों से पूछताछ की है। इसमें 33 पन्नों में 18 गवाहों के बयान दर्ज हैं। आरोपी के भागते समय किसी भी अधिकारी ने पुलिस जवानों को कार्रवाई के आदेश नहीं दिए। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी घटनाक्रम के बाद त्वरित कार्रवाई न करने में लापरवाही के दोषी मिले हैं।
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कई सुझाव भी दिए हैं। आयुक्त ने पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल की बात कही है। जहां अवैध निर्माण गिराने की कार्रवाई को अंजाम देना है, वहां पहले किसी भी तरह की अनहोनी के लिए पुलिस रेकी को महत्वपूर्ण बताया गया है।
आयुक्त की रिपोर्ट पर अब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को अगली कार्रवाई करनी है। यह तय माना जा रहा है कि मामले में लापरवाही के आरोपी बताए जा रहे कुछ और अफसरों पर गाज गिर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस हत्याकांड के खिलाफ स्वत: संज्ञान लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए अधिकारियों को फटकार लगाई थी और कहा था कि अगर ऐसे हत्या हत्या होगी तो आदेश देना मुश्किल हो जाएगा।
प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही थी। इसके बाद प्रदेश सरकार ने त्वरित जांच का जिम्मा तत्कालीन मंडलायुक्त को सौंपा था।