डीएफओ शहरी इंद्र कुमार का तबादला कुछ दिन पहले ही हुआ था। बताया जा रहा है कि नगर निगम में भाजपा के कुछ पार्षद डीएफओ के काम से खुश नहीं थे। इन्होंने विभाग और मंत्री के समक्ष अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी। इसके चंद दिन बाद ही डीएफओ का तबादला हो गया।
लेकिन अब मेयर की अगुवाई में बाकी पार्षदों के डीएफओ के समर्थन में उतरने से सियासत फिर गरमा गई है। इससे पहले भी भाजपा पार्षदों की आपसी खींचतान के चलते आयुक्त और डीएफओ ग्रामीण के तबादले हो चुके हैं। देखना होगा इस बार कौन सा गुट अपनी बात मनवाने में कामयाब रहता है।