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विवादों में पड़ा हिमाचल का 1143 करोड़ का बागवानी प्रोजेक्ट

Mon, 27 Feb 2017 10:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल के बागवानों में ढेरों उम्मीदें जगाने वाला 1143 करोड़ का प्रोजेक्ट विवादों में घिर गया है। शुरू में प्रोजेक्ट के महज साढे़ पांच करोड़ खर्च करने पर ही विवाद खड़ा हो गया है। इटली से आयातित संक्रमित पौधों का मामला इन दिनों खासा चर्चा में है। इस पर राजभवन शिमला ने भी सरकार से रिपोर्ट तलब कर ली है।
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विश्व बैंक की मदद से प्रदेश में बागवानी क्षेत्र के उत्थान को 1143 करोड़ का प्रोजेक्ट लाने का सरकारी स्तर पर खूब हो-हल्ला किया गया। माना गया कि यह प्रदेश की बागवानी का कायाकल्प कर देगा। अफसरों की एक लॉबी प्रोजेक्ट के खिलाफ थी तो विश्व बैंक से ऋण के रूप में इतने बड़े बजट को मंजूर करवाने वाले हिमाचल के अफसर अपनी पीठ भी ठोंकते रहे।

इनका तर्क था कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को 500 करोड़ का बागवानी प्रोजेक्ट दिया है तो हिमाचल की अनदेखी की है। विश्व बैंक की मदद से सरकार के अपने प्रयास से लाया गया यह प्रोजेक्ट प्रदेश में बागवानी की सूरत बदल देगा। इसके तहत प्रदेश में सेब और अन्य फलों की बागवानी को मुख्यधारा में लाया जाना है। उच्च गुणवत्तापूर्ण फलों की पैदावार की जानी है।
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हिमाचल में विदेशी पौधों की अपनी नर्सरी तैयार की जानी है। बगीचों के लिए सिंचाई का प्रावधान भी किया जाना है। इस प्रोजेक्ट में ही इटली से महज साढे़ पांच करोड़ खर्च पौधे मंगवाए गए। कुल 2,25,000 मंगवाए हैं। इनमें 72,000 रूट स्टॉक हैं। 22 हजार मदर प्लांट बागवानी विभाग के बगीचों में लगाए गए हैं। जेरोमाइन, रेड विडोक्स, ग्रैनी स्मिथ, रेडलम गाला आदि किस्में मंगवाई हैं। इनसे सेब की आधुनिक किस्मों को पूरे प्रदेश मेें फैलाया जाना है, मगर इटली से आए पौधों में रोग और कीटों के आने के बाद प्रोजेक्ट शुरू में ही विवादित हो गया है। 

क्या बताते हैं प्रधान सचिव बागवानी  
प्रधान सचिव बागवानी जेसी शर्मा का अभी भी कहना है कि यह परियोजना निश्चित रूप से प्रदेश की बागवानी का कायाकल्प करेगी। इटली से मंगवाए पौधों के साथ ऐसा कोई रोग, कीट या वायरस नहीं आया है, जैसा दुष्प्रचार हो रहा है। जिन पौधों में सामान्य संक्रमण था, वे नष्ट कर दिए गए हैं। बागवानों को रियायती दरों पर पौधे दिए जा रहे हैं।

बागवान किसी भी तरह के दुष्प्रचार में न आएं। कुछ तत्व अपने स्वार्थ से ये दुष्प्रचार कर रहे हैं। इनसे सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने बागवानों की आर्थिकी को सुधारने के लिए ये बीड़ा उठाया है। सरकार अपना काम निर्बाध तरीके से करेगी। ये प्रोजेक्ट सही ढंग से लागू होगा। 
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