शहर के कोर एरिया में निर्माण पर पाबंदी
एमसी ने इसी एरिया में रखा टाउनहॉल बनाने का प्लान
नक्शे और सर्वे पर फूंका गया जनता का लाखों रुपया
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में नगर निगम का टाउनहॉल भवन बनाने का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट तो सिरे चढ़ा नहीं लेकिन इसके नाम पर अफसरों ने 18 लाख रुपये फूंक दिए। सर्वे करने और भवन का नक्शा बनाने के नाम पर यह पैसा बर्बाद कर दिया।
अब प्रोजेक्ट रद्द होने के साथ ही इस पर सवाल उठ रहे हैं कि जब अफसर जानते थे कि शहर के कोर एरिया में निर्माण कार्य पर पाबंदी है तो फिर इसी एरिया में इतना बड़ा प्रोजेक्ट बनाने का प्लान किस आधार पर तैयार कर दिया। 50 करोड़ से बनने वाला यह टाउनहॉल भवन सब्जी मंडी मैदान पर बनना था। यह क्षेत्र कोर एरिया में शामिल है। एनजीटी ने साल 2017 में शहर के कोर एरिया में भवन निर्माण पर पूर्ण पाबंदी लगा रखी है। पांच साल से यहां निर्माण कार्य बंद हैं लेकिन इन सबके बीच नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने कोर एरिया में ही इस प्रोजेक्ट को बनाने की ठान ली।
दावा किया कि यह दफ्तर प्रीफैब तकनीक से बनेगा और इस अस्थायी स्ट्रक्चर को अनुमति मिल जाएगी। दूसरा यह जनता को सुविधा देने से जुड़ा प्रोजेक्ट है लेकिन अधिकारी यह भी जानते थे कि स्मार्ट सिटी की खत्म हो रही समय सीमा को देखते हुए एनजीटी से जल्द इसकी अनुमति लेना आसान नहीं होगा। बावजूद इसके बीते डेढ़ साल से इसके सर्वे और नक्शे बनवाते रहे। सर्वे वाली कंपनी और नक्शे बनाने वाले आर्किटेक्ट लाखों रुपये लेकर चले गए और अब प्रोजेक्ट भी रद्द हो गया।
आखिर जिम्मेदार कौन
स्मार्ट सिटी प्रबंधन का तर्क है कि भवन बनाने के लिए एनजीटी से अनुमति लेना मुश्किल नहीं था। लेकिन हिमुडा ने प्रोजेक्ट के नक्शे, सर्वे रिपोर्ट समेत अन्य औपचारिकताएं पूरी करने में समय लगा दिया। इससे प्रोजेक्ट में देरी हुई। इसलिए इसे रद्द करने का फैसला लिया। हिमुडा का दावा है कि नगर निगम के कहे अनुसार नक्शे बनाए और समय पर तैयार करके दिए थे। यह निगम को सोचना चाहिए था कि जो काम करवा रहे हैं, उसकी अनुमति मिलनी भी है या नहीं। वहीं नगर निगम का कहना है कि एनजीटी से अनुमति लेना लंबी प्रक्रिया है। इसलिए इसके बनने की उम्मीद कम थी।