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शहर से सटे पंचायती इलाके नगर निगम में शामिल करने पर छिड़ा घमासान

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चम्याणा के लोगों ने जताई नाराजगी, कुछ लोगों ने किया समायोजन का समर्थन
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर से सटे पंचायती इलाके नगर निगम में शामिल करने के फैसले पर घमासान छिड़ गया है। एक ओर पंचायत प्रतिनिधि इस फैसले के खिलाफ हैं तो दूसरी ओर कई संगठन नगर निगम में शामिल होने के लिए जोर लगा रहे हैं।
बुधवार को चम्याणा पंचायत के प्रतिनिधि फैसले पर आपत्ति जताने के लिए ग्रामीणों के साथ डीसी कार्यालय पहुंच गए। इसी बीच संजय वन कमलानगर के लोग भी संगठन के साथ इस फैसले के समर्थन में ज्ञापन देने आए। चम्याणा पंचायत प्रधान रीता चौहान और उपप्रधान यशपाल वर्मा ने कहा कि पंचायत के छकड़ैल, उदयनगर इलाका नगर निगम में शामिल किया जा रहा है जबकि ग्रामीण इसके खिलाफ हैं।
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बिल्डरों और ठेकेदारों को फायदा देने के लिए यह फैसला लिया है। इस तरह से सरकार ने ब्योलिया, मैहली, मल्याणा और सरघीण इलाके को नगर निगम में शामिल नहीं किया उसी तरह चम्याणा पंचायत को भी शामिल न किया जाए। नगर निगम में शामिल होते ही ग्रामीण लोगों को मनरेगा, आवासीय योजनाओं समेत पंचायत में मिलने वाली कई लाभकारी योजनाओं से वंचित रहना पड़ेगा। इसके अलावा लोगों को गोशाला समेत भवन निर्माण के लिए नक्शे समेत कई तरह की औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ेंगी। पंचायत प्रधान ने कहा कि छकड़ैल खासकर उदयनगर सड़क से नीचे का क्षेत्र कतई नगर निगम में शामिल न किया जाए। पंचायत खुद इन इलाकों का विकास करने में सक्षम है।
संजय वन कमलानगर के लोगों ने डीसी को ज्ञापन सौंपा और सरकार के फैसले का समर्थन किया। कहा कि वह नगर निगम में शामिल होना चाहते हैं ताकि पेयजल, सीवरेज जैसी सुविधाएं मिल सके। पंचायत में इतना बजट नहीं है कि जिससे हर इलाके का विकास हो सके। नगर निगम में शामिल होने से उन्हें फायदा होगा। लोग निगम में आने के लिए तैयार हैं।
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दर्ज करवा सकेंगे आपत्तियां
शहरी विकास विभाग ने नगर निगम में शामिल किए पंचायती इलाकों पर आपत्तियां दर्ज करवाने के लिए एक हफ्ते का वक्त दिया था जो शुक्रवार को खत्म हो रहा है। कुल पांच पंचायतों के शहरी इलाके नगर निगम में शामिल किए जा रहे हैं। अभी तक चम्याणा पंचायत ने विरोध दर्ज करवाया है। यह आपत्तियां डीसी के माध्यम से कल शाम तक दर्ज करवाई जा सकेंगी।
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