सदन ने जूनियर कर्मियों को भी बना दिया पात्र
एक साल का अनुभव वाला बन सकेगा प्रशासनिक अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। नगर निगम में प्रशासनिक अधिकारी बनाने के सदन के फैसले पर एक और विवाद खड़ा हो गया है। फैसले में भर्ती और पदोन्नति नियमों को ताक पर रखकर जूनियर कर्मचारियों को भी प्रशासनिक अधिकारी बनाने के लिए पात्र बना दिया है।
नगर निगम आयुक्त समेत निगम के अधिकारी और कर्मचारी हैरान हैं। आशंका जताई जा रही है कि सदन की लिखित कार्यवाही (प्रोसिडिंग) से छेड़छाड़ की है। नगर निगम में पहली बार प्रशासनिक अधिकारी का पद भरा जाना है। सरकार से इसकी मंजूरी मिलने के बाद बीते महीने नगर निगम सदन ने इस पद के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को मंजूरी दी थी। इस पद पर अधीक्षक ग्रेड वन के पद का एक साल का अनुभव रखने वाले वरिष्ठतम अधीक्षक को नियुक्त किया जाना है।
सदन ने इसमें एक और शर्त जोड़ दी कि अधीक्षक कम से कम स्नातक पास होना चाहिए। नगर निगम में कुल तीन ग्रेड वन अधीक्षक हैं लेकिन तीनों यह शर्त पूरी नहीं करते। ऐसे में पद खाली रह गया। विवाद तब हुआ जब कुछ दिन पहले सदन के फैसले की लिखित कार्यवाही सामने आई। इसमें ग्रेड टू अधीक्षक को भी प्रशासनिक अधिकारी के लिए पात्र बताया है। इससे स्नातक पास और एक साल का अधीक्षक ग्रेड टू भी अब ग्रेड वन अधीक्षक को सुपरसीड कर प्रशासनिक अधिकारी बन सकता है।
यूनियन ने जताया विरोध
नगर निगम कर्मचारी यूनियन ने कहा कि इन शर्तों से व्यवस्था बिगड़ जाएगी। जूनियर सीनियर के ऊपर बैठेंगे तो काम कैसे होगा। ग्रेड टू अधीक्षक को ग्रेड वन पद पर पदोन्नत होने के लिए तीन साल का अनुभव होना चाहिए।
फैसले की होगी समीक्षा : आयुक्त
नगर निगम आयुक्त आशीष कोहली ने कहा कि सदन ने इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्नातक की शर्त लगाई थी। ग्रेड वन के साथ ग्रेड टू अधीक्षक को भी इस पद पर तैनाती देने को लेकर चर्चा नहीं हुई। प्रोसिडिंग में यह कैसे आ गया, इसकी समीक्षा की जाएगी।