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महिला के पॉजिटिव आने पर उपचार देने से कर दिया मना

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आईजीएमसी के कुछ चिकित्सकों की उपेक्षा से परिजन मरीज को ले गए चंडीगढ़
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महिला की रीड़ की हड्डी में आई थी गंभीर चोट
डॉक्टर बोले, पहले कोराना का ही होगा इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में आपात स्थिति में आई महिला मरीज को चिकित्सकों ने कोविड पॉजिटिव आने पर उपचार देने से मना कर दिया। महिला को कार दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में चोट (स्पाइन इंजरी) आई थी। लेकिन रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर डॉक्टर बोले कि पहले सिर्फ कोरोना का इलाज होगा। इससे आहत परिजन मरीज को चंडीगढ़ इलाज के लिए ले गए।
परिजन हरि सिंह ने कहा कि वह डॉक्टरों के व्यवहार से आहत हैं तथा इसकी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर पर करेंगे। डॉक्टरों की जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि गंभीर स्थिति में इलाज के लिए आए मरीजों को इलाज मिल सकें। जिला शिमला के रामपुर गांवबलथाना की रहने वाली महिला एक कार दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो गई थीं। इस दुर्घटना में उनकी पीठ में गंभीर चोटें आईं। इलाज के लिए महिला को 25 जनवरी की रात को आईजीएमसी रेफर किया गया।
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परिजन हरि सिंह ने आरोप लगाया कि छुट्टियां होने के कारण उनके मरीज को देखा तक नहीं गया। 27 जनवरी को डॉक्टरों ने एमआरआई लिखा लेकिन शाम छह बजे के करीब कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव निकली। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें सामान्य इलाज देने से मना कर दिया। कहा कि अब केवल कोरोना का ही इलाज होगा। इसके बाद मरीज को उपचार न मिलने से उन्हें मजबूरन चंडीगढ़ ले जाना पड़ा। परिजन हरि सिंह, सुभाष भंडारी और नगीन चौहान ने अस्पताल प्रबंधन से सवाल किया कि क्या गंभीर मरीजों के इलाज के प्रति डॉक्टरों का कोई दायित्व नहीं है?
इलाज से क्यों मना किया जानकारी नहीं : डॉ. राहुल
आईजीएमसी के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. राहुल गुप्ता ने बताया कि पर्ची पर लिखे
डायग्नोज के आधार पर ही चिकित्सक मरीज का इलाज करते हैं। उन्हें क्यों मना किया गया इसकी जानकारी नहीं है।
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