डिस्पोजेबल कप-प्लेट्स का इस्तेमाल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को दावत दे रहे हैं।
थर्मोकोल से बने डिस्पोजेबल कप-प्लेट्स का इस्तेमाल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को दावत दे रहे हैं। डिस्पोजेबल कप-प्लेट्स गर्म चीजों के संपर्क में आते ही इनमें इस्तेमाल बिसचेनोल केमिकल और रंग खाद्य वस्तुओं में घुलकर पेट तक पहुंच जाता है।
सबसे पहले व्यक्ति को गैस, एलर्जी, खून की उल्टी, सीने में दर्द, खांसी और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। पेट के कई और रोग चपेट में ले सकते हैं। डिस्पोजेबल के अधिक इस्तेमाल से ये रोग 80 फीसदी तक कैंसर का खतरा बढ़ा देते हैं।
होटलों, ढाबों और पार्टियों में थर्मोकोल डिस्पोजेबल कप-प्लेट्स का बेरोकटोक जमकर इस्तेमाल हो रहा है। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से अनजान लोग घरों में थर्मोकोल डिस्पोजेबल कप-प्लेट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।
हिमाचल में पॉलिथीन और प्लास्टिक से बने डिस्पोजेबल कप-प्लेट्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगा है। लिहाजा, यहां थर्मोकोल डिस्पोजेबल कप-प्लेट्स का प्रचलन बढ़ गया है लेकिन हिमाचल में इस घातक केमिकल की जांच के लिए कोई लैब नहीं है।
डॉक्टरों ने माना सेहत के लिए है खतरनाक
प्लास्टिक को रिसाइकल कर प्रयोग में लाना खतरे से खाली नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग के डेजिगनेटिड अधिकारी एलडी ठाकुर ने कंडाघाट लैब को जांच के लिए लिखा था लेकिन वहां से इनकार कर दिया गया। अब ठाकुर ने गाजियाबाद स्थित लैब से मदद मांगी है ताकि इसकी पूरी जांच हो सके।
थर्मोकोल को बनाने में केमिकल इस्तेमाल होते हैं। गर्म खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने से थर्मोकोल बनाने में इस्तेमाल की गई आर्टिफिशियल सिंथेटिक चीजें अन नेचुरल तरीके से शरीर में प्रवेश करती हैं और कैंसर का कारण बनती हैं।- प्रो. आरके सीम, कैंसर अस्पताल शिमला के प्रमुख
थर्मोकोल डिस्पोजेबल कप-प्लेट्स के अधिक प्रयोग से गैस, एलर्जी और पेट के कई रोग पनप रहे हैं। बाद में ये रोग कैंसर का रूप धारण कर लेते हैं। प्लास्टिक को रिसाइकल कर प्रयोग में लाना खतरे से खाली नहीं है। - डॉ. एनके भारद्वाज, एमओएच हमीरपुर